Haryana News: अवैध खनन पर हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन! चीफ जस्टिस की सरकार को दो टूक- ‘दोषी ठेकेदारों को सीधे करो ब्लैकलिस्ट’

अवैध खनन मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को तीखी फटकार लगाई है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 22, 2026

Haryana News: हरियाणा में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन के मामलों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार के खिलाफ बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार किया है। हाई कोर्ट ने राज्य की खनन नीतियों और कार्रवाई के तरीकों पर तीखे सवाल खड़े करते हुए सरकार से पूछा है कि नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले दागी ठेकेदारों पर सिर्फ मामूली जुर्माना लगाकर उन्हें क्यों छोड़ दिया जा रहा है? कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में संलिप्त ठेकेदारों को हमेशा के लिए अयोग्य (ब्लैकलिस्ट) घोषित क्यों नहीं किया गया?

चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खान एवं भूविज्ञान विभाग के महानिदेशक (Director General of Mines and Geology) को कड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल कर इस पूरी स्थिति पर जवाब देने का निर्देश दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अब 7 जुलाई को मुकर्रर की गई है।

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जनहित याचिका से खुला राज

यह पूरा मामला देवेंद्र यादव द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) के बाद अदालत के सामने आया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में साक्ष्यों के साथ यह आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार और उसका प्रशासन राज्य में धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन के खेल पर सख्त कार्रवाई करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। प्रशासन का रवैया माइनिंग माफियाओं और नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों के प्रति बेहद नरम और ढुलमुल रहा है, जिससे सरकारी राजस्व और पर्यावरण दोनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

कोर्ट रूम का ड्रामा

सुनवाई के दौरान जब अदालत ने सरकार से अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा, तो सरकार की ओर से दलील दी गई कि वे इस मामले में सक्रिय हैं। सरकार ने पीठ को बताया कि अवैध खनन में शामिल पाए गए दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई करते हुए कुल 33.90 लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना लगाया गया है।

정कार का यह तर्क सुनते ही खंडपीठ भड़क गई। कोर्ट ने तीखा सवाल दागा कि जब ठेकेदारों द्वारा नियमों का गंभीर उल्लंघन किया जाना पूरी तरह साबित हो चुका है, तो उन्हें सिर्फ चंद लाख रुपए का आर्थिक दंड देकर इतनी आसानी से क्यों छोड़ दिया गया? कोर्ट का रुख साफ था कि महज जुर्माना लगाना इस तरह के गंभीर अपराधों के लिए कोई ठोस सजा नहीं है।

सरकार की ‘शॉर्ट टर्म परमिट’ वाली दलील खारिज

अदालत के तीखे तेवरों को देखते हुए हरियाणा सरकार के वकीलों ने बचाव में एक नई दलील पेश की। सरकार ने कहा कि जिन ठेकेदारों पर कार्रवाई हुई है, वे ‘शॉर्ट टर्म परमिट’ (कम अवधि के लाइसेंस) धारक थे, इसलिए उन पर स्थायी प्रतिबंध जैसी कार्रवाई नहीं की गई।

हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने ‘हरियाणा माइनर मिनरल रूल्स-2012’ की कानूनी व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि कानून की नजर में माइनिंग परमिट, कॉन्ट्रैक्ट (ठेका) और लीज (पट्टा) ये सभी चीजें ‘मिनरल कंसेशन’ (खनिज रियायत) के दायरे में ही आती हैं। इसलिए, नियमों को ताक पर रखने वाले हर छोटे-बड़े अपराधी पर कानून के तहत समान रूप से कठोर कार्रवाई लागू होनी चाहिए। अदालत के इस सख्त रुख के बाद अब हरियाणा के खनन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

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