Haryana News: चरखी दादरी प्रशासन को हाईकोर्ट की कड़ी फटकार! अवैध खनन पर एडीएम लेवल की जांच के आदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने चरखी दादरी में कथित अवैध खनन और पर्यावरण उल्लंघनों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 7, 2026

Haryana News: हरियाणा के चरखी दादरी जिले में कथित अवैध खनन और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध खनन नहीं होना चाहिए। साथ ही अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है।

हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में किसी कनिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी, बल्कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) स्तर के अधिकारी को स्वयं मौके का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

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हाई कोर्ट ने प्रशासन को लगाई फटकार

यह मामला विजय और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि संबंधित क्षेत्र में दी गई माइनिंग लीज जनवरी 2026 में समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद बिना नवीनीकरण के बड़े स्तर पर खनन गतिविधियां जारी हैं।

इस पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने स्पष्ट कहा कि जिला मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करें कि इलाके में किसी भी स्तर पर अवैध खनन न होने पाए।

एडीएम स्तर के अधिकारी को सौंपा जिम्मा

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल औपचारिक रिपोर्ट देना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से स्थल का निरीक्षण करना होगा और वास्तविक स्थिति की जानकारी शपथपत्र के साथ अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मामले की जांच और रिपोर्टिंग किसी छोटे अधिकारी के भरोसे नहीं छोड़ी जाएगी। अदालत ने एडीएम स्तर से नीचे के अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपने पर रोक लगाते हुए प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

अरावली क्षेत्र में पर्यावरण नुकसान का मुद्दा भी उठा

मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की गई है। इस दौरान इसे एक अन्य संबंधित याचिका के साथ सुना जाएगा, जिसमें चरखी दादरी के अरावली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय क्षति और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का मुद्दा उठाया गया है।

अदालत ने पहले की सुनवाई में भी राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर की थी। हाई कोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही, संभावित मिलीभगत और प्राकृतिक संसाधनों की लूट जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि पर्यावरण जैसे संवेदनशील मुद्दे को बेहद हल्के में लिया गया है।

जांच समिति के प्रस्ताव पर भी जताई नाराजगी

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पूर्व आदेशों के अनुपालन के बजाय जांच समिति गठित करने के प्रस्ताव पर भी असंतोष जताया। अदालत ने साफ कहा कि जब पहले से न्यायिक निर्देश लागू हैं, तब समानांतर प्रक्रियाओं के जरिए उनसे बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

खंडपीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि अरावली क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने संकेत दिए कि यदि अवैध खनन जारी पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

पर्यावरण संरक्षण पर बढ़ी सख्ती

हाई कोर्ट के इस रुख को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां प्रशासन को अदालत के सामने विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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