Haryana News: हरियाणा की जिला अदालतों में जजों और वकीलों के बीच तालमेल और न्याय प्रक्रिया को गति देने वाली अभियोजन व्यवस्था (Prosecution System) इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। अदालतों में मुकदमों की पैरवी करने वाले सरकारी वकीलों की भारी किल्लत हो गई है, जिसके कारण हजारों आपराधिक मामलों की सुनवाई अधर में लटकी हुई है। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि जिला अदालतें कानून अधिकारियों की भारी कमी का सामना कर रही हैं, जिससे सीधे तौर पर आपराधिक मामलों की सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
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दफ्तरों में बाबू बने लीगल अफसर
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट निर्देश जारी किया है। हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि सरकार के विभिन्न प्रशासनिक विभागों, सरकारी बोर्डों और निगमों में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर भेजे गए सभी 285 जिला अटार्नी (DA), डिप्टी जिला अटार्नी (DDA) और सहायक जिला अटार्नी (ADA) को तत्काल प्रभाव से उनके मूल विभागों में वापस बुलाया जाए। इन सभी अधिकारियों की एक सप्ताह के भीतर जिला अदालतों में तैनाती सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है, ताकि न्यायिक कार्यों में आ रही बाधा को दूर किया जा सके।
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान पीठ ने पाया कि बड़ी संख्या में प्रशिक्षित और योग्य कानून अधिकारियों को अदालतों में पैरवी करने के बजाय विभिन्न सरकारी दफ्तरों में गैर-न्यायिक और लिपिकीय (बाबू वाले) कार्यों में झोंक दिया गया है।
हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी
खंडपीठ ने इस प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि निचली अदालतों में अभियोजन पक्ष को न्याय व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन वर्तमान में इन अधिकारियों के अभाव के कारण पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। जो अधिकारी अदालतों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए नियुक्त किए गए थे, वे फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल पर खिसकाने में लगे हैं।
अदालत ने रोष जताते हुए कहा कि इस त्रुटिपूर्ण नीति ने पूरी न्यायिक प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। सरकारी वकीलों की अनुपस्थिति के कारण मुकदमों के निस्तारण में अनावश्यक और अत्यधिक देरी हो रही है, जिससे आम जनता का न्याय प्रणाली पर से भरोसा उठ सकता है। हाई कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी है कि वे एक सप्ताह के भीतर इस आदेश का पालन कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपे, अन्यथा इसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा। इस सख्त आदेश के बाद अब हरियाणा के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
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