Haryana News: अनुराग रस्तोगी का वर्तमान कार्यकाल आगामी 30 जून को समाप्त हो रहा है। राज्य सरकार अब उनके अनुभव और प्रशासनिक निरंतरता का लाभ उठाने के लिए उन्हें 3 महीने से लेकर एक वर्ष तक का दूसरा सेवा विस्तार दिलाने की पुरजोर कोशिश में है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के भरोसेमंद अफसरों में गिने जाने वाले रस्तोगी के लिए यह कवायद राज्य की प्रशासनिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।
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प्रशासनिक स्थिरता बनाम वरिष्ठता की लड़ाई
यदि अनुराग रस्तोगी को दूसरा एक्सटेंशन मिलता है, तो हरियाणा की वरिष्ठता सूची में शीर्ष पर बैठे कई अधिकारियों की दावेदारी प्रभावित होगी। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोर-शोर से है कि यदि रस्तोगी पद पर बने रहते हैं, तो 1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुधीर राजपाल और डॉ. सुमिता मिश्रा की मुख्य सचिव बनने की संभावनाएं क्षीण हो जाएंगी।
सुधीर राजपाल इसी साल 30 नवंबर को और डॉ. सुमिता मिश्रा 31 जनवरी 2027 को सेवानिवृत्त होने वाली हैं। ऐसे में सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि वह प्रशासनिक निरंतरता को प्राथमिकता दे या फिर इन वरिष्ठ अधिकारियों को सेवानिवृत्ति से पहले शीर्ष पद पर मौका दे। सरकार का मानना है कि पिछले डेढ़ साल में राज्य में शुरू किए गए बड़े डिजिटल और प्रशासनिक सुधारों की निगरानी के लिए रस्तोगी जैसे अनुभवी अफसर की मौजूदगी अनिवार्य है।
यूपी मॉडल की तर्ज पर मिल सकता है विस्तार
राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा को बल यूपी के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा के उदाहरण से मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले मिश्रा को यूपी में अपने ढाई साल के कार्यकाल के दौरान तीन बार सेवा विस्तार मिला था। उसी तर्ज पर हरियाणा सरकार भी केंद्र से रस्तोगी के लिए एक वर्ष के एक्सटेंशन का आग्रह कर रही है।
प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा गहरा असर
हरियाणा में मुख्य सचिव केवल एक प्रशासनिक प्रमुख नहीं, बल्कि राज्य की नीतियों और बड़े फैसलों को लागू करने वाली कड़ी होता है। सरकार ने पिछले कुछ समय में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की हैं, जिनका क्रियान्वयन सीधे मुख्य सचिव के स्तर पर हो रहा है। ऐसे में चुनाव और अन्य महत्वपूर्ण चुनौतियों के बीच सरकार किसी भी बड़े प्रशासनिक बदलाव का जोखिम नहीं लेना चाहती। हालांकि, अनुराग रस्तोगी को सेवा विस्तार मिलेगा या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के पाले में है।
अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि हरियाणा सरकार की प्रशासनिक टीम में कौन नेतृत्व करेगा। फिलहाल, यह पूरा मामला राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के करियर और सरकार की भविष्य की कार्ययोजना के बीच एक बड़ा संतुलन बिंदु बना हुआ है।
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