Haryana News: हरियाणा के शिक्षा विभाग ने हजारों प्रमोटेड पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स (पीजीटी) के भविष्य और करियर को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत सभी प्रमोटेड पीजीटी शिक्षकों से उनकी अंतिम पसंद यानी ऑप्शन और बाकायदा एक अंडरटेकिंग (शपथ पत्र) लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस पूरी कवायद के बाद अब प्रत्येक शिक्षक को स्वयं यह तय करना होगा कि वह भविष्य में पीजीटी पद पर ही अपनी सेवाएं जारी रखना चाहता है या फिर अपने मूल टीजीटी या सीएंडवी कैडर में वापस लौटकर वरिष्ठता के आधार पर हेडमास्टर या एलिमेंट्री स्कूल हेडमास्टर बनने का विकल्प चुनना चाहता है। विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों द्वारा चुना गया यह विकल्प अंतिम और पूरी तरह बाध्यकारी होगा, जिसे भविष्य में किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जा सकेगा।
शिक्षकों के सामने रखे गए तीन मुख्य विकल्प
शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रमोटेड पीजीटी शिक्षकों को अपने भविष्य के निर्धारण के लिए कुल तीन विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से उन्हें किसी एक का चयन करना होगा:
पहला विकल्प (पीजीटी पद पर बने रहना): यदि कोई शिक्षक पीजीटी के पद पर ही अपनी सेवाएं जारी रखना चाहता है, तो उसे इसके पक्ष में अपनी लिखित सहमति देनी होगी। इस विकल्प को चुनने पर शिक्षक भविष्य में हेडमास्टर के पद पर पदोन्नति का दावा नहीं कर सकेगा और उसकी सेवाएं स्थायी रूप से पीजीटी कैडर में ही मानी जाएंगी।
दूसरा विकल्प (मूल कैडर में लौटकर हेडमास्टर बनना): यह विकल्प उन शिक्षकों के लिए है जो अपने मूल टीजीटी या सीएंडवी पद पर वापस लौटना चाहते हैं ताकि वे अपनी वरिष्ठता के आधार पर हेडमास्टर बन सकें। इस स्थिति में उन्हें पीजीटी का पद छोड़ना होगा और उस पद से उनका अधिकार हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
तीसरा विकल्प (ईएसएचएम के रूप में पदोन्नति): इस अंतिम विकल्प के तहत शिक्षक अपने मूल टीजीटी/सीएंडवी कैडर में लौटकर एलिमेंट्री स्कूल हेडमास्टर (ESHM) के पद पर पदोन्नति का रास्ता चुन सकते हैं। इस रास्ते को अपनाने पर भी पीजीटी पद पर उनका दावा पूरी तरह समाप्त माना जाएगा।
30 दिनों की समय-सीमा और डीईओ को सख्त निर्देश
शिक्षा निदेशालय ने सभी प्रमोटेड पीजीटी शिक्षकों को नोटिस जारी होने की तिथि से मात्र 30 दिनों के भीतर निर्धारित प्रारूप में अपना अंतिम विकल्प और अंडरटेकिंग जमा करने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिक्षक तय समय-सीमा के भीतर अपना विकल्प नहीं सौंपता है, तो विभाग स्वतः यह मान लेगा कि वह पीजीटी पद पर ही सेवा जारी रखने का इच्छुक है और उसे पीजीटी कैडर में ही नियमित मान लिया जाएगा। इसके बाद किसी भी प्रकार की आपत्ति या दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और तेजी से पूरा करने के लिए निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को ‘मोस्ट अर्जेंट’ श्रेणी के तहत कड़े निर्देश दिए हैं। डीईओ को यह सुनिश्चित करना होगा कि आदेश जिले के हर शिक्षक तक पहुंचे, विकल्प पत्र की मूल प्रति डीडीओ कार्यालय में सुरक्षित रखी जाए, तथा सभी विकल्पों की स्कैन कॉपियां सात दिन के भीतर ई-मेल के माध्यम से निदेशालय को भेजी जाएं।
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