Haryana News: रियल एस्टेट कंपनी पर सरकार सख्त, नई परियोजनाओं को नहीं मिलेगी मंजूरी

हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने रियल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड और उसके सात निदेशकों के खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए राज्य में उनकी किसी भी नई परियोजना के लाइसेंस पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 16, 2026

Haryana News: हरियाणा के रियल एस्टेट सेक्टर से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (TCPD) ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी ‘पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड’ (Parsvnath Developers Limited) और उसके निदेशकों के खिलाफ एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। विभाग ने इस कंपनी को हरियाणा राज्य के भीतर किसी भी नई परियोजना (New Project) के लिए नया लाइसेंस जारी करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। सरकार की यह दंडात्मक कार्रवाई बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी, सरकारी नियमों के खुले उल्लंघन और करोड़ों रुपये की भारी-भरकम बकाया राशि को चुकता न करने के गंभीर मामलों को देखते हुए की गई है।

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धोखाधड़ी की कई FIR और जनता से वादाखिलाफी

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पार्श्वनाथ डेवलपर्स का ट्रैक रिकॉर्ड और साख लगातार खराब हो रही थी। कंपनी के खिलाफ देश की राजधानी नई दिल्ली में धोखाधड़ी (Cheating), आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) और सोची-समझी साजिश रचने से जुड़े कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में साल 2020 की एक मुख्य प्राथमिकी (FIR) और वर्ष 2024 में दर्ज की गई छह अलग-अलग एफआईआर शामिल हैं। अदालतों और पुलिस थानों में दर्ज इन मुकदमों ने कंपनी की कार्यशैली और उसकी नीयत पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।

आपराधिक मुकदमों के अलावा, विभाग को आम जनता और घर खरीदारों (Homebuyers) से भी लगातार ढेरों शिकायतें मिल रही थीं। लोगों का आरोप है कि कंपनी ने प्लॉट और फ्लैट बेचते समय जो वादे और एग्रीमेंट किए थे, उन्हें तय समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया। खरीदारों के पैसे फंसने और प्रोजेक्ट अधर में लटके होने के कारण हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) भी इस बिल्डर के खिलाफ पहले ही कई कड़े आदेश और पेनाल्टी जारी कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी के रवैये में कोई सुधार नहीं देखा गया।

333 करोड़ से ज्यादा का सरकारी बकाया और एक्ट के तहत कार्रवाई

कंपनी की इस मनमानी पर लगाम लगाने के लिए विभाग ने वित्तीय और कानूनी हंटर चलाया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पार्श्वनाथ डेवलपर्स पर 19 सितंबर 2024 तक एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (EDC) और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज (SIDC) के रूप में कुल 333.31 करोड़ रुपये की भारी राशि बकाया है। बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी कंपनी ने इस सरकारी राजस्व का भुगतान नहीं किया।

इसी वित्तीय डिफॉल्ट और धोखाधड़ी को आधार बनाते हुए सरकार ने ‘हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज एक्ट 1975’ की धारा 12 (Section 12) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल किया है। इस कानून के तहत कार्रवाई करते हुए मुख्य कंपनी और उसके सात बड़े निदेशकों (Directors) को भविष्य में किसी भी नए डेवलपमेंट लाइसेंस के लिए ब्लैकलिस्ट यानी प्रतिबंधित कर दिया गया है।

इन शहरों के प्रोजेक्ट्स हुए डिफाल्टर

पार्श्वनाथ डेवलपर्स को हरियाणा के प्रमुख शहरों जैसे सोनीपत, पानीपत और रोहतक में विभिन्न आवासीय टाउनशिप और परियोजनाओं को विकसित करने के लिए साल 2006 से 2010 के बीच कई महत्वपूर्ण लाइसेंस जारी किए गए थे। इन प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं—

सोनीपत: सेक्टर 8, 9, 10, 11, 17 और 18 के प्रोजेक्ट्स।

पानीपत: सेक्टर 38 और 39 की परियोजनाएं।

रोहतक: सेक्टर 33 और 33-ए के आवासीय क्षेत्र।

चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी पुराने लाइसेंसों की कानूनी वैधता (Validity) अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और कंपनी ने नियमों के मुताबिक इनके नवीनीकरण (Renewal) के लिए सरकार के पास कोई आवेदन भी नहीं किया।

विभाग ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए आदेश में स्पष्ट किया है कि कंपनी के साथ-साथ उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल सात मुख्य निदेशकों को भी व्यक्तिगत रूप से प्रतिबंधित किया गया है, ताकि वे किसी दूसरी नई कंपनी के नाम पर भी लाइसेंस न ले सकें। ब्लैकलिस्ट किए गए निदेशकों में दीपा गुप्ता, रक्षिता शर्मा, राजीव जैन, प्रदीप कुमार जैन, संजीव जैन, सुभाष चंद्र सेतिया और अशोक कुमार के नाम शामिल हैं। हरियाणा सरकार के इस कड़े कदम से डिफाल्टर बिल्डरों में हड़कंप मच गया है।

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