Haryana News: हरियाणा की खेती हुई हाईटेक, 8 लाख किसानों को मिला डिजिटल पहचान पत्र

हरियाणा में खेती-किसानी अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। 'एग्रीस्टैक' कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 96% गांवों की डिजिटल मैपिंग और 1.75 करोड़ कृषि भूखंडों की जियो-रैफरेंसिंग पूरी हो चुकी है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 19, 2026

Haryana News: हरियाणा में पारंपरिक खेती को आधुनिक और डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र और राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी एग्रीस्टैक (AgriStack) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के कृषि क्षेत्र का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इस योजना के तहत राज्य के करीब 1.75 करोड़ कृषि भूखंडों (Agri Plots) की जियो-रैफरेंसिंग की जा चुकी है और लगभग 96 प्रतिशत गांवों का डिजिटल मानचित्रण (Digital Mapping) पूरा हो चुका है। इस डिजिटल डेटाबेस के माध्यम से अब तक 8.32 लाख से अधिक किसानों की विशिष्ट ‘किसान आईडी’ तैयार की जा चुकी है, जिससे उन्हें सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।

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क्या है मुख्य सचिव का विजन और इसके फायदे?

हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई एग्रीस्टैक कार्यक्रम की संचालन समिति की बैठक में इस डिजिटल प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि एग्रीस्टैक पहल सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह किसानों के भूमि स्वामित्व, फसल के विवरण और उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर एक पारदर्शी व्यवस्था खड़ी कर रही है।

इस प्रणाली के पूरी तरह लागू होने से निम्नलिखित बड़े फायदे होंगे, किसानों को मिलने वाली सब्सिडी, मुआवजा और अन्य वित्तीय सहायता सीधे और बेहद कम समय में उनके खातों तक पहुंचेगी। एक ही भूमि या फसल पर बार-बार लाभ उठाने की गड़बड़ियों पर पूरी तरह रोक लगेगी। सरकार के पास सटीक डेटा उपलब्ध होने से भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से डिजाइन और लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाया जा सकेगा।

डिजिटल मैपिंग और किसान रजिस्ट्री का काम तेज, CSC की मदद

समीक्षा बैठक के दौरान साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के कुल 7,100 गांवों में से 6,808 गांवों की जियो-रैफरेंसिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जो कि कुल संख्या का 95.89 प्रतिशत है। बचे हुए गांवों को भी आगामी दो महीनों के भीतर इस दायरे में शामिल कर लिया जाएगा।

राजस्व विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस डिजिटल मैपिंग के आधार पर एक प्रमाणित ‘किसान रजिस्ट्री’ तैयार की जा रही है। इस पंजीकरण प्रक्रिया को और तेज करने के लिए पूरे प्रदेश में कॉमन सर्विस सेंटरों (CSC) को सक्रिय रूप से जोड़ा गया है। सीएससी नेटवर्क के मैदान में उतरने से ग्रामीण इलाकों में किसानों के पंजीकरण की रफ्तार में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है।

अगस्त 2026 से शुरू होगा खरीफ डिजिटल फसल सर्वेक्षण

बैठक में आगामी खरीफ-2026 डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों को लेकर भी रूपरेखा तैयार की गई। यह अपनी तरह का एक अनूठा और व्यापक सर्वेक्षण होगा, जो हरियाणा के सभी 23 जिलों के अंतर्गत आने वाले हर एक जियो-रैफरेंस किए गए कृषि भूखंड को कवर करेगा।

इस विशाल कार्य को समय पर और सटीकता से पूरा करने के लिए लगभग 6,500 प्रशिक्षित सर्वेक्षकों की टीम मैदान में उतारी जाएगी। यह सर्वेक्षण अगस्त 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू होने की संभावना है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राजस्व विभाग के मौजूदा डेटाबेस में मौजूद करीब 1.75 करोड़ भूमि रिकॉर्ड्स का मिलान इस डिजिटल फसल सर्वेक्षण से किया जाएगा। इसके बाद किसान रजिस्ट्री का दायरा और अधिक विस्तृत एवं त्रुटिहीन हो जाएगा, जो भविष्य में हरियाणा के किसानों को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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