Haryana News: DC के आदेश हवा-हवाई! सोनीपत अस्पताल प्रशासन की लापरवाही, भीषण हीटवेव के बीच मरीज काटने को मजबूर चक्कर।

सोनीपत सिविल अस्पताल में हीट वेव के बीच मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ओपीडी में पंखे बंद मिलने से लोग गर्मी और उमस में घंटों बैठने को मजबूर हैं।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 20, 2026

Haryana News: सोनीपत में इन दिनों भीषण गर्मी और लू (Heat Wave) का प्रकोप जारी है। आसमान से बरसती आग के बीच आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र माना जाने वाला सोनीपत का सिविल अस्पताल खुद ‘अव्यवस्थाओं के बुखार’ से पीड़ित नजर आ रहा है। अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण यहाँ इलाज कराने आ रहे मरीज और उनके तीमारदार नरकीय स्थिति का सामना करने को मजबूर हैं।

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तपते ओपीडी (OPD) रूम

अस्पताल के भीतर के हालात बेहद चिंताजनक और डराने वाले हैं। रिकॉर्ड तोड़ते तापमान के बीच अस्पताल की ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में लगे पंखे बंद पड़े मिले। इसके चलते ओपीडी परिसर किसी भट्टी की तरह तप रहा था। दूर-दराज के इलाकों से अपनी बीमारियों का इलाज कराने आए मरीजों को इस भीषण उमस और गर्मी में घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ा।

अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों का गर्मी के मारे दम फूल रहा था। कई लोगों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि ओपीडी के भीतर उमस इस कदर हावी थी कि सांस लेना तक दूभर हो रहा था।

बुजुर्ग, महिलाएं और मासूम बच्चे सबसे ज्यादा परेशान

इस बदइंतजामी का सबसे बुरा असर समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग पर पड़ रहा है। अस्पताल में आए। जो पहले से ही कमजोरी और उम्र जनित बीमारियों से जूझ रहे हैं। जिन्हें लंबी लाइनों में बिना हवा के खड़ा रहना पड़ रहा है। जो इस भयंकर तपिश को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और बिलख रहे हैं। जो लोग अस्पताल में बीमारी से राहत पाने की उम्मीद लेकर आए थे, यहाँ की अव्यवस्थाओं ने उनकी शारीरिक और मानसिक मुश्किलें कई गुना और बढ़ा दी हैं।

कागजों में सिमटी DC की गाइडलाइन

चौंकाने वाली और सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि इस अव्यवस्था से ठीक एक दिन पहले ही जिला उपायुक्त (DC) ने हीट वेव को लेकर एक सख्त गाइडलाइन जारी की थी। इस सरकारी आदेश में स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त पंखे और कूलरों की व्यवस्था की जाए। ठंडे और साफ पीने के पानी के पुख्ता इंतजाम हों।
हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए विशेष वार्ड और दवाइयां तैयार रखी जाएं।

लेकिन सिविल अस्पताल की जमीनी हकीकत इन सरकारी दावों और आदेशों के बिल्कुल उलट दिखाई दी। उपायुक्त के आदेशों को अस्पताल प्रबंधन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।

कैमरा देख भागे जिम्मेदार अधिकारी

जब मीडिया की टीम ने अस्पताल का दौरा किया और इस बदहाली को अपने कैमरों में कैद करना शुरू किया, तो अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। अपनी कमियां छिपानी की कोशिश में अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी मीडिया के कैमरों से दूरी बनाते और भागते नजर आए। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस घोर लापरवाही पर सीधा जवाब देने को तैयार नहीं था। हमेशा की तरह, अपनी नाकामी छुपाने के लिए अधिकारी जिम्मेदारी की गेंद एक-दूसरे के पाले में डालते दिखाई दिए।

आखिर जनता किस पर करे भरोसा?

इस पूरी घटना ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जिला अस्पताल जैसी संवेदनशील और जीवन रक्षक जगह पर ही मरीज गर्मी और उमस में तड़पने को मजबूर हैं, तो आम जनता आखिर किस पर भरोसा करे? अब देखना यह होगा कि इन तस्वीरों और मीडिया रिपोर्टों के सामने आने के बाद उच्च अधिकारी कोई सख्त एक्शन लेते हैं या फिर यह मामला भी हमेशा की तरह फाइलों में दबकर दम तोड़ देगा।

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