Haryana News: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरियाणा के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर देश का नाम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने अपने दमदार खेल से यह साबित कर दिया कि भारत के खेल जगत में हरियाणा की भूमिका सबसे मजबूत राज्यों में बनी हुई है। भारत को मिले कुल 13 स्वर्ण पदकों में से 7 गोल्ड मेडल हरियाणा के खिलाड़ियों ने अपने नाम किए, जबकि कुल 10 पदक प्रदेश की झोली में आए। यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और राज्य की खेल संस्कृति का परिणाम मानी जा रही है।
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7 अगस्त को होगा खिलाड़ियों का सम्मान
आपको बता दें कि, राज्य सरकार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 7 अगस्त को पंचकूला में आयोजित विशेष समारोह में पदक विजेताओं के साथ-साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों का भी सम्मान करेंगे। इस दौरान खिलाड़ियों को पुरस्कार और सम्मान पत्र देकर उनके योगदान को सराहा जाएगा।
कम खिलाड़ियों के बावजूद बड़ी उपलब्धि
बताते चलें कि, इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा से केवल 23 खिलाड़ी शामिल हुए थे, जबकि पिछले संस्करण में यह संख्या काफी अधिक थी। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह दर्शाता है कि प्रदेश के खिलाड़ी केवल संख्या में नहीं, बल्कि प्रदर्शन के स्तर पर भी लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
भिवानी ने फिर दिखाई मुक्केबाजी की ताकत
हरियाणा का भिवानी जिला लंबे समय से देश की मुक्केबाजी की पहचान रहा है। इस बार भी जिले के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाले। प्रीति पंवार, जैस्मिन लांबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया धनखड़ और सचिन सिवाच ने बॉक्सिंग में शानदार जीत दर्ज कर प्रदेश का मान बढ़ाया। भिवानी की खेल अकादमियों और प्रशिक्षकों की मेहनत का परिणाम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिला। इसी कारण अब इस जिले को खेल जगत में नई पहचान मिल रही है।
अन्य जिलों के खिलाड़ियों ने भी बढ़ाया मान
भिवानी के अलावा हरियाणा के अन्य जिलों के खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। रेवाड़ी की शर्मिला धनखड़ ने शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। वहीं हिसार के अंकुश पंघाल ने मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक हासिल कर प्रदेश की उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया।
इसके अलावा नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक, नरेंद्र बेरवाल ने बॉक्सिंग में रजत, जबकि यशवीर और सीमा कालीरमन ने कांस्य पदक जीतकर भारत की पदक संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
हरियाणा की खेल नीति बनी सफलता की वजह
हरियाणा की खेल नीति को देश की सबसे प्रभावी नीतियों में माना जाता है। प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता मिलने पर नकद पुरस्कार, सरकारी नौकरी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराती है। गांव-गांव में खेल नर्सरी, आधुनिक स्टेडियम, बेहतर प्रशिक्षण और महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष योजनाएं भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
हरियाणा के अधिकांश खिलाड़ी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कठिन मेहनत और समर्पण के बल पर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं और आने वाली पीढ़ी को खेलों में आगे बढ़ने का संदेश देती हैं।
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स्वर्णिम भविष्य की ओर हरियाणा
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में मिला शानदार प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि हरियाणा आज भारत की सबसे मजबूत खेल शक्ति के रूप में उभर चुका है। यदि खिलाड़ियों को इसी तरह सरकार का सहयोग और बेहतर सुविधाएं मिलती रहीं, तो आने वाले वर्षों में ओलंपिक और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी प्रदेश के खिलाड़ी देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे। 7 अगस्त का सम्मान समारोह इन खिलाड़ियों के संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों को सलाम करने का अवसर होगा।










