Haryana News: CM सैनी का गन्ना किसानों को तोहफा, टिश्यू कल्चर और प्रोत्साहन राशि पर बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई स्टेट फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर मिल्स की समीक्षा बैठक में गन्ने की नई और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों को किसानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 9, 2026

Haryana News: हरियाणा के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए राज्य सरकार की तरफ से एक बहुत ही शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हाल ही में ‘स्टेट फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर मिल्स’ की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के कृषि क्षेत्र और विशेष रूप से गन्ना किसानों की आय को बढ़ाने और उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए कई बड़े और दूरदर्शी फैसले लिए गए हैं। आइए जानते हैं इस बैठक में लिए गए सभी महत्वपूर्ण निर्णयों के बारे में विस्तार से।

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गन्ने की उच्च गुणवत्ता के लिए चार नई टिशू कल्चर लैब

राज्य में गन्ने की खेती को आधुनिक और अधिक लाभदायक बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। समीक्षा बैठक के दौरान यह तय किया गया कि किसानों तक गन्ने की नई, उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों को आसानी से पहुंचाया जाए। इसके लिए हरियाणा के रोहतक, महम, पानीपत और करनाल स्थित सहकारी चीनी मिलों (शुगर मिल्स) में कुल चार अत्याधुनिक टिशू कल्चर लैब स्थापित की जाएंगी।

इन लैबों के जरिए किसानों को बेहतरीन किस्म के रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा, यदि जरूरत पड़ी तो किसानों को सर्वोत्तम गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने के लिए उसे अन्य राज्यों से भी मंगवाया जाएगा। इन सभी प्रयासों का मुख्य उद्देश्य खेतों में गन्ने की उत्पादकता (Productivity) और चीनी की रिकवरी (Sugar Recovery) के स्तर को काफी हद तक बढ़ाना है।

प्रोत्साहन राशि में बंपर बढ़ोतरी

पारंपरिक खेती के तरीकों से हटकर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने वाले किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा वित्तीय ऐलान किया है।

बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि: सरकार ने 4 फीट की दूरी पर चौड़ी कतारों (Wide Rows) में गन्ने की बुवाई करने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि को 3 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दिया है।

किसानों को सीधा लाभ: इस पहल से न केवल गन्ने की पैदावार बेहतर होगी, बल्कि चौड़ी कतारों में खेती करने से खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई में भी आसानी होगी, जिससे सीधे तौर पर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

किसानों से संवाद और पारदर्शिता पर विशेष जोर

प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने और किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

हर चार महीने पर बैठकें: सभी सहकारी चीनी मिलों के प्रबंध निदेशकों (MDs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से हर चार महीने में किसानों के साथ सीधी बैठक करें, ताकि उनकी जमीनी समस्याओं को समझा जा सके।

सुझाव पेटियां (Suggestion Boxes): गन्ना तुलाई केंद्रों पर विशेष रूप से सुझाव पेटियां लगाई जाएंगी, जिनमें किसान अपनी किसी भी प्रकार की शिकायत, समस्या या विकास से जुड़ा सुझाव बेझिझक दर्ज करा सकेंगी।

समयबद्ध कार्रवाई: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इन पेटियों में मिलने वाली शिकायतों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए, ताकि किसानों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

सरकार के इन फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य प्रशासन गन्ना किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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