West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए दावा किया कि SIR के मुद्दे पर विपक्ष जिस बड़े आंदोलन का दावा कर रहा है, उसका असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। अधिकारी ने कहा कि SIR को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम की तस्वीर अब काफी हद तक स्पष्ट हो चुकी है।
SIR प्रदर्शन में भीड़ को लेकर उठाए सवाल

शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में श्रीरामपुर में हुई ममता बनर्जी की सभा का जिक्र करते हुए भीड़ को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अदालत की अनुमति के बाद आयोजित सभा में करीब 150 लोग ही मौजूद थे। हालांकि, सभा को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं और आयोजन से पहले पुलिस कार्रवाई तथा कार्यकर्ताओं की कथित हिरासत को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने भी सवाल उठाए थे।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने श्रीरामपुर में प्रस्तावित सभा की अनुमति देते हुए अधिकतम 1,000 लोगों की मौजूदगी की सीमा तय की थी। अदालत ने आयोजन के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई निर्देश भी दिए थे।
27 लाख नामों पर क्या बोले शुभेंदु अधिकारी?
SIR प्रक्रिया में करीब 60 लाख मतदाताओं की प्रविष्टियों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ यानी तार्किक विसंगतियों के आधार पर जांच के दायरे में रखा गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, adjudication के बाद करीब 32.68 लाख नाम पात्र पाए गए, जबकि लगभग 27.16 लाख नाम हटाने के आदेश दिए गए। इन आंकड़ों को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार जारी है।
शुभेंदु अधिकारी ने इस पूरी प्रक्रिया को न्यायिक निगरानी से जुड़ा बताते हुए कहा कि चुनाव अधिकारियों ने संबंधित मामलों पर न्यायिक अधिकारियों की भूमिका में कार्रवाई की। उन्होंने यह भी दावा किया कि SIR को लेकर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने कई बार सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और अदालतों की निगरानी में प्रक्रिया आगे बढ़ी। हालांकि, SIR को लेकर ममता बनर्जी लगातार चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाती रही हैं।
SIR को लेकर केरल में प्रदर्शन की दी चुनौती
शुभेंदु अधिकारी ने SIR के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और माकपा नेता एमए बेबी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी नेता SIR के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, तो उन्हें केरल में भी प्रदर्शन करना चाहिए। अधिकारी ने तिरुवनंतपुरम में प्रदर्शन करने की चुनौती देते हुए पश्चिम बंगाल और केरल की चुनावी परिस्थितियों को अलग-अलग बताया।
अधिकारी का कहना है कि पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी ‘तार्किक विसंगतियों’ की स्थिति को दूसरे राज्यों के घटनाक्रम से अलग करके देखा जाना चाहिए। वहीं, विपक्षी नेता SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर अपनी आपत्तियां लगातार उठा रहे हैं। ममता बनर्जी ने 26 सितंबर को श्रीरामपुर की सभा में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध जारी रखने की बात कही थी।
पश्चिम बंगाल में SIR पर बढ़ती सियासी गर्मी

पश्चिम बंगाल में SIR अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण का प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद बन चुका है। एक ओर शुभेंदु अधिकारी इसे प्रक्रिया और न्यायिक निगरानी से जुड़ा मामला बता रहे हैं, वहीं विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR से जुड़े आंकड़ों, अपीलों और अदालतों में चल रही कार्यवाही पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।










