Haryana News: सरकारी सेवा रिकॉर्ड में लंबे समय से दर्ज जन्मतिथि में बदलाव करवाना अब कर्मचारियों के लिए आसान नहीं होगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और कड़े फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी वर्षों तक अपनी एक निश्चित जन्मतिथि को स्वीकार करता रहा है और नौकरी के काफी समय बीत जाने के बाद बिना किसी ठोस और पर्याप्त कारण के उसमें बदलाव की मांग करता है, तो केवल नए जन्म प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेजों के आधार पर सर्विस रिकॉर्ड में संशोधन नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि जन्मतिथि में सुधार करना कर्मचारी का कोई मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह समय-सीमा और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
Haryana News: हरियाणा में फिर बिगड़ा मौसम, 13 जिलों में भारी बारिश का
क्या था पूरा मामला और याचिकाकर्ता का दावा?
यह पूरा मामला कैथल निवासी सूरजमल से जुड़ा हुआ है, जिनकी नियमित दूसरी अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, सूरजमल ने साल 1985 में अपनी मैट्रिक (दसवीं) की परीक्षा का फॉर्म भरते समय स्वयं अपनी जन्मतिथि 1 दिसंबर 1968 दर्ज करवाई थी। इसके बाद जब साल 1997 में उनकी सरकारी सेवा में नियुक्ति हुई, तो सेवा पुस्तिका (Service Book) में भी यही जन्मतिथि दर्ज की गई और उन्होंने लंबे समय तक इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
हालांकि, इसके करीब 11 साल बाद यानी 2008 में सूरजमल ने अचानक दावा किया कि उनकी वास्तविक जन्मतिथि 1 दिसंबर 1968 नहीं, बल्कि 2 जुलाई 1969 है। अपने इस दावे के समर्थन में उन्होंने गांव के चौकीदार के रजिस्टर और एक नए जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाते हुए सरकारी रिकॉर्ड में अपनी जन्मतिथि सुधरवाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू कर दी।
अदालत ने खारिज की अपील, कहा- देरी का नहीं बताया संतोषजनक कारण
माम की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरकेश मनुजा की बेंच ने कड़ा रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर मुख्य रूप से जोर दिया कि याचिकाकर्ता लगभग 23 वर्षों तक अपनी उस जन्मतिथि को बिना किसी विरोध के स्वीकार करता रहा, जो उसने खुद अपने हाथों से भरी थी।
अदालत ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता यह स्पष्ट करने में पूरी तरह असमर्थ रहा कि उसे अपनी जन्मतिथि में कथित गलती का पता इतने लंबे समय (23 वर्षों) के बाद अचानक कैसे हुआ। हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कानूनी मामलों में अत्यधिक देरी और पर्याप्त कारण का अभाव होने पर इस तरह के दावों को सिरे से खारिज किया जा सकता है।
निचली अदालत का फैसला बरकरार
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को अपनी मुहर लगाते हुए सूरजमल की अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह से बरकरार रखा। हाईकोर्ट के इस सख्त फैसले से यह संदेश स्पष्ट हो गया है कि सरकारी कर्मचारी अपनी नौकरी के अंतिम दौर में या वर्षों की सेवा के बाद प्रशासनिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ या उम्र में फेरबदल का लाभ नहीं उठा सकते। अदालतों का यह रुख उन मामलों पर लगाम लगाने का काम करेगा जहां लोग नौकरी के शुरुआती लाभ या सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के लिए रिकॉर्ड में बदलाव के प्रयास करते हैं।
Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, सफाई कर्मचारियों की सैलरी










