Haryana News: फैक्ट्री मालिकों के लिए बड़ी खबर! हरियाणा में नए नियमों से मिलेगी राहत

हरियाणा सरकार ने अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित करने के लिए नई नीति लागू की है। इसके तहत, 3 अक्टूबर 2025 से पहले स्थापित ऐसी कॉलोनियों को 'सिविक अमेनिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिफिशिएंट एरिया' घोषित कर वहां सड़क, पानी, सीवरेज और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 19, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव करते हुए अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित करने के लिए एक व्यापक नई नीति अधिसूचित की है। यह निर्णय उन हजारों उद्यमियों और श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत है, जो अब तक बुनियादी सुविधाओं के अभाव में चुनौतियों का सामना कर रहे थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा बजट में की गई घोषणा के अनुरूप, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इस संबंध में विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है।

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नीति का मुख्य उद्देश्य और पात्रता

इस नई नीति का प्राथमिक उद्देश्य राज्य में फैली अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को ‘सिविक अमेनिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिफिशिएंट एरिया’ घोषित कर वहां बुनियादी ढांचा विकसित करना है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि यदि औद्योगिक क्लस्टरों को सड़क, पेयजल, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं मिलेंगी, तो इससे न केवल उद्योगों की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि वहां कार्यरत श्रमिकों का जीवन स्तर भी बेहतर होगा।

नीति का लाभ उठाने के लिए कुछ स्पष्ट मानदंड निर्धारित किए गए हैं:

क्षेत्रफल और इकाइयां: कॉलोनी का कम से कम 10 एकड़ के निरंतर भू-भाग में फैला होना अनिवार्य है। साथ ही, उस क्षेत्र में न्यूनतम 50 औद्योगिक इकाइयों का संचालन होना आवश्यक है।

कट-ऑफ तिथि: केवल वही औद्योगिक इकाइयां इस योजना के अंतर्गत पात्र मानी जाएंगी, जो 3 अक्टूबर 2025 से पहले स्थापित की गई हैं।

स्वामित्व का प्रमाण: मालिकाना हक सिद्ध करने के लिए 3 अक्टूबर 2025 से पूर्व का पंजीकृत बिक्री विलेख (Sale Deed) या ‘एग्रीमेंट टू सेल’ मान्य होगा।

छह महीने में आवेदन अनिवार्य

सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए समय-सीमा निर्धारित की है। नीति लागू होने की तिथि से छह महीने के भीतर संबंधित औद्योगिक कॉलोनियों को आवेदन करना अनिवार्य होगा। आवेदन प्रक्रिया के लिए 15 प्रकार के दस्तावेजों की सूची तैयार की गई है, जिसमें प्रमुख हैं:

शजरा प्लान और ले-आउट प्लान।

ड्रोन और सैटेलाइट इमेज।

बिजली बिल और फैक्ट्री लाइसेंस।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति और फायर एनओसी (NOC)।

जांच प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिलास्तरीय जांच समिति का पुनर्गठन किया गया है। अब इस समिति में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को भी शामिल किया गया है। समिति की सिफारिशों को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक के माध्यम से अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा।

औद्योगिक विकास के लिए एक ‘गेम चेंजर’

वर्ष 2022 की नीति और 2023 के राहत निर्देशों में संशोधन कर लाया गया यह बदलाव कानूनी बाधाओं को दूर करता है। पहले औद्योगिक कॉलोनियां इस तरह की नियमितीकरण नीति के दायरे से बाहर थीं, लेकिन अब कानून में संशोधन कर इन्हें शामिल करना राज्य सरकार की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।

यह नई व्यवस्था न केवल अनधिकृत क्षेत्रों को कानूनी दर्जा प्रदान करेगी, बल्कि राज्य में सुरक्षित और सुव्यवस्थित कार्य वातावरण का निर्माण भी करेगी। स्पष्ट है कि बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से हरियाणा के औद्योगिक क्लस्टर अब वैश्विक मानकों की ओर कदम बढ़ा सकेंगे, जिससे निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

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