Haryana News: हरियाणा में शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। विभाग के नए निर्देश के बाद राज्य में कार्यरत करीब 12 हजार शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इन शिक्षकों के लिए अब हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी HTET (Haryana Teacher Eligibility Test) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयसीमा और उपलब्ध अवसरों के भीतर HTET उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे शिक्षकों के सामने नौकरी छोड़ने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने की स्थिति पैदा हो सकती है। इस आदेश के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों में चर्चा तेज हो गई है।
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किन शिक्षकों पर लागू होगा नया आदेश?

जानकारी के मुताबिक, शिक्षा विभाग ने अलग-अलग श्रेणियों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों को चिन्हित किया है, जिन्होंने नियुक्ति के समय या उसके बाद निर्धारित अवधि में HTET परीक्षा पास नहीं की थी। विभाग के नियमों के तहत शिक्षण कार्य जारी रखने के लिए संबंधित शिक्षकों का निर्धारित पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी माना गया है। ऐसे में विभाग ने अब इन शिक्षकों को पात्रता संबंधी शर्त पूरी करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के बाद उन शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है, जिनकी नियुक्ति को लंबा समय हो चुका है, लेकिन वे अभी तक HTET की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर पाए हैं।
नौकरी बचाने के लिए HTET पास करना जरूरी
नए निर्देश का सबसे बड़ा असर उन शिक्षकों पर पड़ सकता है जो लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन पात्रता परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। विभाग के रुख से साफ संकेत मिल रहे हैं कि निर्धारित नियमों को पूरा नहीं करने वाले कर्मचारियों को आगे सेवा जारी रखने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार की ओर से पात्रता परीक्षा को लेकर सख्ती बरते जाने का उद्देश्य शिक्षकों की आवश्यक योग्यता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। हालांकि, प्रभावित शिक्षकों के लिए यह फैसला चिंता का कारण बन गया है।
शिक्षक संगठनों में बढ़ी हलचल

शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों में भी हलचल बढ़ गई है। कई शिक्षक संगठनों ने प्रभावित कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। संगठनों का मानना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के मामले में सरकार को मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। शिक्षक संगठनों की ओर से सरकार से इस मामले में राहत देने, अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने या कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग उठने की संभावना है। उनका कहना है कि हजारों शिक्षकों की नौकरी पर सीधे असर डालने वाले फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
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