Haryana News: आईएमए ने वापस लिया इलाज बंद करने का फैसला, मरीजों को राहत

हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर बड़ा विवाद उस समय खत्म हो गया जब आईएमए ने इलाज बंद करने का अपना फैसला वापस ले लिया। आखिर क्या हुआ बैठक में जिससे यह यू-टर्न लिया गया? मरीजों को राहत कैसे मिली और स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, जानिए पूरी कहानी।

आईएमए ने वापस लिया इलाज बंद करने का फैसला

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 5, 2026

Haryana News: हरियाणा में आयुष्मान भारत के तहत इलाज बंद करने का प्रस्ताव वापस ले लिया गया है। इस फैसले से राज्य के लाखों मरीजों को बड़ी राहत मिली है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पहले 5 जून से योजना लाभर्थियों का इलाज रोकने की घोषणा की थी, लेकिन अब इसे वापस ले लिया गया है। इस निर्णय के बाद योजना से जुड़े मरीजों का इलाज पहले की तरह जारी रहेगा और स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।

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अहम बैठक के बाद बदला फैसला

आपको बता दें कि, यह बदलाव हरियाणा हेल्थ प्रोटेक्शन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतबीर मान के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित किए बिना लंबित मामलों का समाधान निकाला जाएगा और मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

लंबित भुगतान और क्लेम प्रक्रिया पर सहमति

बताते चलें कि, बैठक में सबसे अहम मुद्दों में से लंबित भुगतान का समय पर निपटारा रहा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि बकाया भुगतान को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा ताकि अस्पतालों को आर्थिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर भी सहमति बनी। साथ ही यह भी तय किया गया कि बिना उचित कारण की जाने वाली कटौतियों को रोका जाएगा, जिससे अस्पतालों को अनावश्यक नुकसान न हो।

अस्पतालों की समस्याओं के समाधान के लिए नई व्यवस्था

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सूचीबद्ध अस्पतालों की समस्याओं को सुलझाने के लिए एक व्यवस्थित और संवादात्मक तंत्र विकसित किया जाएगा। इससे अस्पतालों और प्राधिकरण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक बाधाओं को कम करना और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

नियमित संवाद से दूर होंगी गलतफहमियां

आईएमए ने बताया कि भविष्य में प्राधिकरण और निजी अस्पतालों के बीच नियमित संवाद स्थापित किया जाएगा। इससे किसी भी प्रकार की गलतफहमी या विवाद को समय रहते सुलझाया जा सकेगा। संगठन का मानना है कि लगातार बातचीत से प्रणाली अधिक मजबूत होगी और मरीजों को निर्बाध सेवाएं मिलती रहेंगी।

क्लेम कटौती पर पारदर्शिता जरूरी

बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि किसी क्लेम में कटौती की जाती है, तो उसका स्पष्ट और उचित कारण देना अनिवार्य होगा। इससे अस्पतालों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस आधार पर निर्णय लिया गया है। आईएमए ने अपने सभी सदस्य अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे आयुष्मान टीम द्वारा उठाई गई आपत्तियों का समय पर और सही जवाब दें, ताकि प्रक्रिया में देरी न हो।

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मरीजों के हित में बड़ा कदम

इस पूरे निर्णय को मरीजों के हित में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रहेंगी, बल्कि अस्पतालों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल भी स्थापित होगा।