Haryana News: एक साथ रहने पर नहीं मिलेगा डबल HRA, हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

हरियाणा हाई कोर्ट के नए फैसले ने सरकारी कर्मचारियों के बीच हलचल बढ़ा दी है। अब एक ही घर में रहने वाले सरकारी दंपतियों को अलग-अलग HRA नहीं मिलेगा। आखिर कोर्ट ने ऐसा फैसला क्यों सुनाया और इसका असर कितने कर्मचारियों पर पड़ेगा, जानिए इस बड़े फैसले की पूरी कहानी।

एक साथ रहने पर नहीं मिलेगा डबल HRA

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 11, 2026

Haryana News: हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अहम कानूनी फैसला सामने आया है, जिसने हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़े नियमों को लेकर स्पष्टता दे दी है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं और एक ही शहर में रहकर एक ही घर में निवास कर रहे हैं, तो उन्हें अलग-अलग HRA का लाभ नहीं दिया जा सकता।

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कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

आपको बता दें कि, अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि रेंट अलाउंस का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को किराए के मकान में रहने के लिए आर्थिक सहायता देना है। इसका मकसद अतिरिक्त लाभ या दोहरा फायदा देना नहीं है। इसलिए अगर एक ही परिवार में दो सरकारी कर्मचारी एक ही आवास का उपयोग कर रहे हैं, तो दोनों को अलग-अलग HRA देना नियमों के खिलाफ माना जाएगा।

सरकारी दंपतियों के लिए नियम सख्त

वहीं, इस फैसले के बाद हरियाणा सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। अब सभी संस्थानों को इस नियम का पालन सुनिश्चित करना होगा कि एक ही घर में रहने वाले दंपतियों को डबल HRA न दिया जाए। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ता है और नियमों का दुरुपयोग होता है।

मामला कैसे पहुंचा हाई कोर्ट

यह मामला सुशील सिंगला द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि उनकी पत्नी एक बैंक में कार्यरत हैं और वे स्वयं एक अलग सरकारी संस्थान में काम करते हैं। दोनों अलग-अलग विभागों में सेवा दे रहे हैं, इसलिए दोनों को HRA का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि संबंधित निगम ने उनका HRA रोक दिया था, यह कहते हुए कि उनकी पत्नी को पहले से सरकारी आवास सुविधा प्राप्त है।

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अदालत का निर्णय और तर्क

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि एक ही घर में रह रहे पति-पत्नी यदि दोनों HRA ले रहे हैं, तो यह नियमों की भावना के खिलाफ है। अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था अनुचित लाभ (undue benefit) की श्रेणी में आती है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

फैसले का असर और प्रशासनिक सख्ती

इस फैसले के बाद अब हरियाणा में हजारों सरकारी कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है जो ऐसे लाभ का उपयोग कर रहे थे। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि HRA केवल वास्तविक जरूरत के आधार पर ही दिया जाए, न कि किसी अतिरिक्त लाभ के रूप में।