Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, जमीन लेन-देन पर लगेगी कड़ी रोक

हरियाणा सरकार ने जमीन लेन-देन को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है, जिसके तहत अब संपत्ति खरीद-फरोख्त पर कड़ी निगरानी और रोक लगाई जाएगी। इस कदम का उद्देश्य अवैध जमीन कारोबार और धोखाधड़ी को रोकना बताया जा रहा है। इससे राज्य के रियल एस्टेट बाजार में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 21, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने शहरी और नगर पालिका क्षेत्रों के आसपास जमीन की अदला-बदली (एक्सचेंज) से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब किसी भी तरह की जमीन की अदला-बदली के लिए राज्य सरकार या संबंधित सक्षम प्राधिकरण से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधित व्यवस्था का उद्देश्य अवैध कॉलोनियों के निर्माण और जमीन के अनियमित लेन-देन पर रोक लगाना है।

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संशोधन विधेयक 2026 पर स्थिति स्पष्ट

हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा के बजट सत्र में पारित कर दिया गया था, लेकिन अभी तक राज्यपाल की स्वीकृति न मिलने के कारण इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है। इसी कारण वित्तायुक्त राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग से इस विषय में स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।

एक एकड़ से कम जमीन पर भी मंजूरी अनिवार्य

संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब एक एकड़ से कम क्षेत्रफल वाली भूमि की बिक्री, पट्टा, उपहार या अदला-बदली से पहले भी नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशक या अधिकृत अधिकारी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेना आवश्यक होगा। यह नियम हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा-7 के अंतर्गत लागू किया गया है।

फर्जीवाड़े और अवैध कॉलोनियों पर रोक का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि कई मामलों में यह देखा गया है कि छोटे भूखंडों की अदला-बदली के जरिए बड़े या अधिक मूल्यवान भूखंडों का लेन-देन किया जा रहा था। यह प्रक्रिया देखने में भले ही एक्सचेंज लगती थी, लेकिन वास्तव में यह अप्रत्यक्ष बिक्री का तरीका था। इससे अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी कर अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा मिल रहा था।

धारा 7-ए में किया गया संशोधन

इस समस्या को रोकने के लिए धारा 7-ए में संशोधन किया गया है, जिसके तहत “पट्टा” के साथ अब “विनिमय विलेख” को भी शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि जमीन की अदला-बदली को भी अब बिक्री के समान ही नियामक प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह संशोधन 30 जनवरी से अध्यादेश के रूप में लागू किया गया है।

शहरी विकास कानून का सख्त प्रविधान

हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 के तहत पहले से ही यह प्रावधान है कि किसी भी अधिसूचित शहरी क्षेत्र में एक एकड़ से कम भूमि के हस्तांतरण से पहले सक्षम प्राधिकारी से एनओसी लेना जरूरी है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित विकास और अवैध कॉलोनियों के फैलाव को रोकना है।

सरकार का उद्देश्य और आगे की दिशा

सरकार का मानना है कि इन सख्त नियमों से जमीन के नाम पर होने वाले फर्जी लेन-देन पर रोक लगेगी और शहरी विकास अधिक व्यवस्थित होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी प्रकार की अनियमित कॉलोनी को कानूनी मान्यता न मिले। इस नए कदम से हरियाणा में जमीन से जुड़े कारोबार में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है और अवैध गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण स्थापित होगा।

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