Greenland Row: ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की तैयारी, सुरक्षा का तर्क या साम्राज्य विस्तार की नई कोशिश?

क्या दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी में हैं डोनाल्ड ट्रंप? ग्रीनलैंड को खरीदने की उनकी पुरानी जिद एक बार फिर चर्चा में है। ट्रंप इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए 'अपरिहार्य' बता रहे हैं, लेकिन क्या यह महज रक्षा रणनीति है या प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जे की एक बड़ी साम्राज्यवादी कोशिश? डेनमार्क के विरोध के बीच ट्रंप का अगला कदम क्या होगा?

Greenland Row

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 8, 2026

Greenland Row:  व्हाइट हाउस ने हाल ही में पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रणनीतिक सलाहकार ग्रीनलैंड पर नियंत्रण स्थापित करने के विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस विशाल द्वीप पर नियंत्रण पाना अनिवार्य हो गया है। हालांकि, दुनिया के सबसे बड़े द्वीप और नाटो (NATO) सदस्य डेनमार्क ने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। वर्तमान में ग्रीनलैंड, डेनमार्क के अधीन एक अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) क्षेत्र है।

ग्रीनलैंड का भूगोल: बर्फ की चादर और सामरिक स्थिति

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो भौगोलिक रूप से उत्तरी ध्रुव या आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है। यह कोई महाद्वीप नहीं बल्कि एक विशाल भू-भाग है जिसकी आबादी बेहद कम है। लगभग 21 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले इस द्वीप पर महज 56,000 लोग रहते हैं, जिनमें अधिकांश इनुइट मूल के हैं। द्वीप का 80 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से बर्फ की मोटी चादर से ढका हुआ है, जिसके कारण यहाँ की अधिकांश आबादी राजधानी ‘नुउक’ सहित दक्षिण-पश्चिमी तटों पर निवास करती है।

आर्थिक संसाधन: मछली पालन से लेकर दुर्लभ खनिजों तक

परंपरागत रूप से ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने पर टिकी है और इसे डेनिश सरकार से भारी आर्थिक सहायता मिलती है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिघलती बर्फ ने यहाँ नए आर्थिक द्वार खोल दिए हैं। इस द्वीप के नीचे यूरेनियम और लौह अयस्क जैसे दुर्लभ खनिजों का भंडार दबा हुआ है। जैसे-जैसे बर्फ कम हो रही है, इन संसाधनों का दोहन आसान होता जा रहा है। ट्रंप की नजर इन कीमती संसाधनों पर टिकी है, जैसा कि उन्होंने पहले यूक्रेन के साथ समझौतों में भी रुचि दिखाई थी।

राष्ट्रीय सुरक्षा और रूस-चीन का खतरा

संसाधनों के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप का आधिकारिक रुख यह है कि ग्रीनलैंड उनके लिए खनिज से अधिक सुरक्षा का विषय है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड वर्तमान में रूसी और चीनी जहाजों से घिरा हुआ है। अमेरिकी रिपब्लिकन सांसदों का भी मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती सक्रियता अमेरिका की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। उनके अनुसार, यदि अमेरिका का ग्रीनलैंड पर नियंत्रण होता है, तो वह इन दुश्मन देशों की गतिविधियों पर बेहतर नजर रख सकेगा।

वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड: ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति

वेनेजुएला में सैन्य अभियान चलाने और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ कार्रवाई के बाद, ट्रंप ने अपना ध्यान ग्रीनलैंड की ओर मोड़ा है। उन्होंने साफ कहा है कि वह इस द्वीप को अमेरिकी नियंत्रण में लेने के अपने प्लान को लेकर “बेहद गंभीर” हैं। ट्रंप के शीर्ष सलाहकार स्टीफन मिलर ने यहाँ तक कह दिया कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कोई भी देश अमेरिका से युद्ध करने की हिम्मत नहीं करेगा।

पेंटागन का ‘इमरजेंसी प्लान’ और सैन्य बल का डर

चिंता की बात यह है कि अमेरिका ने इस क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना को खारिज नहीं किया है। जून 2025 में कांग्रेस की सुनवाई के दौरान रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने स्वीकार किया कि पेंटागन के पास ग्रीनलैंड के लिए “इमरजेंसी प्लान” तैयार हैं। जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के बाद से ही ट्रंप की टीम सैन्य विकल्पों सहित नियंत्रण के विभिन्न तरीकों पर चर्चा कर रही है।

जे.डी. वेंस और जेफ लैंड्री की सक्रियता

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका ने कूटनीतिक दबाव भी बनाना शुरू कर दिया है। मार्च 2025 में उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने ग्रीनलैंड का दौरा किया और डेनमार्क की आलोचना करते हुए कहा कि वे इस क्षेत्र की सुरक्षा में निवेश करने में विफल रहे हैं। इसके बाद, ट्रंप ने जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त किया। लैंड्री ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया है कि इस द्वीप को अनिवार्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा बन जाना चाहिए।

डेनमार्क और नाटो सहयोगियों का कड़ा विरोध

ट्रंप के इन बयानों से डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगी हैरान हैं। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जे की कोई भी कोशिश नाटो गठबंधन के अंत का संकेत होगी। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर ने भी अन्य यूरोपीय नेताओं (फ्रांस, जर्मनी, इटली आदि) के साथ एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है और इसके भविष्य का फैसला केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही कर सकते हैं।

इतिहास के पन्ने: ग्रीनलैंड और अमेरिका का पुराना नाता

ग्रीनलैंड पिछले 300 वर्षों से डेनमार्क के शासन में है, जो वहां से लगभग 3,000 किलोमीटर दूर है। हालांकि, अमेरिका का यहाँ सुरक्षा हित दूसरे विश्व युद्ध के समय से है। जब नाजियों ने डेनमार्क पर कब्जा किया, तब अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपने सैन्य और रेडियो स्टेशन बनाए थे। 1951 की एक रक्षा संधि ने अमेरिका को यहाँ ‘पिटूफिक स्पेस बेस’ (पूर्व में थ्यूल एयर बेस) चलाने का अधिकार दिया। 1979 से ग्रीनलैंड के पास आंतरिक स्व-शासन है, लेकिन रक्षा और विदेशी मामले आज भी डेनमार्क ही देखता है।

ग्रीनलैंड की जनता का रुख: “हम बिकाऊ नहीं हैं”

2026 की शुरुआत में ट्रंप की धमकियों के बीच ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड के लोगों का है। हम अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करते हुए बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन कब्जे की कल्पना बर्दाश्त नहीं।” द्वीप पर हुए सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लोग डेनमार्क से आजादी तो चाहते हैं, लेकिन वे अमेरिका का हिस्सा बनने के विचार को सिरे से खारिज करते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अलेका हैमंड ने ट्रंप के प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि ट्रंप हमारे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे हम कोई निर्जीव वस्तु हों जिसे खरीदा जा सकता है।

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