Iran-France Tension: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच का संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अभी तक यह जंग मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच सिमटी हुई थी, लेकिन ईरान के एक ताजा कदम ने यूरोपीय शक्तियों को भी इस युद्ध में घसीट लिया है। ईरान ने इराक में स्थित फ्रांस के एक सैन्य ठिकाने पर बड़ा हमला कर दिया है। इस घटना के बाद अब यह आशंका गहरा गई है कि फ्रांस भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है, जिससे यह युद्ध विश्व युद्ध जैसी भयावह स्थिति ले सकता है।
इरबिल में फ्रेंच मिलिट्री बेस पर ताबड़तोड़ ड्रोन स्ट्राइक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान ने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित इरबिल (Erbil) में फ्रांसीसी मिलिट्री बेस को अपना निशाना बनाया। ईरान ने इस ऑपरेशन में एक के बाद एक कई ‘सुसाइड ड्रोन’ से हमला किया। यह हमला इतना सटीक और भीषण था कि इसने बेस के एक बड़े हिस्से को नुकसान पहुँचाया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहली बार है जब ईरान ने सीधे तौर पर किसी फ्रांसीसी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। इस स्ट्राइक में शुरुआती तौर पर 6 फ्रांसीसी सैनिकों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर आई, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पुष्टि: एक सैनिक की मौत और भारी नुकसान
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस हमले की पुष्टि करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि इस हमले में फ्रांस के ‘वार्सेस के चेसर्स एल्पिन्स’ की 7वीं बटालियन के मुख्य वारंट अधिकारी, अरनॉड फ्रिओन की मृत्यु हो गई है। मैक्रों ने कहा कि राष्ट्र इस दुख की घड़ी में शहीद सैनिक के परिवार और घायल जवानों के साथ खड़ा है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि फ्रांस की सेना 2015 से इराक में आतंकवाद (दाएश/ISIS) के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है और उन पर इस तरह का हमला पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
ईरान की कार्रवाई पर फ्रांस का कड़ा ऐतराज: “यह हमला अनुचित है”
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने अपने बयान में ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी वर्तमान युद्ध किसी भी सूरत में फ्रांसीसी बलों पर हमले को उचित नहीं ठहरा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इराक में फ्रांस की मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय कानून और आतंकवाद विरोधी मिशन का हिस्सा है। मैक्रों के इस सख्त तेवर से यह संकेत मिल रहे हैं कि फ्रांस अब चुप नहीं बैठेगा और वह ईरान की इस आक्रामकता का जवाब देने के लिए अपने यूरोपीय और नाटो (NATO) सहयोगियों के साथ चर्चा कर रहा है।
ईरान के लिए बढ़ सकती है मुश्किलें: रणनीतिक भूल या सोची-समझी चाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस पर हमला करना ईरान के लिए एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हो सकती है। अब तक फ्रांस और कुछ अन्य यूरोपीय देश कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहे थे, लेकिन अपने सैनिक की शहादत के बाद फ्रांस का रुख पूरी तरह बदल सकता है। यदि फ्रांस इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होता है, तो ईरान को एक साथ अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय संघ की संयुक्त सैन्य शक्ति का सामना करना पड़ेगा। इससे ईरान की घेराबंदी और कड़ी हो सकती है और उसकी अर्थव्यवस्था पर नए प्रतिबंध लग सकते हैं।
जंग के मैदान में बढ़ती तबाही: मिसाइल और ड्रोन का कहर
गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सहयोगी गुटों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी बेस पर ड्रोन और मिसाइलों से प्रहार किया है। लेकिन फ्रांस को इस संघर्ष में शामिल करना आग में घी डालने जैसा है। इरबिल में हुआ यह हमला यह दर्शाता है कि अब कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। दुनिया भर की नजरें अब फ्रांस के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या फ्रांस शांति की अपील करेगा या वह भी ईरान के खिलाफ युद्ध का मोर्चा खोल देगा?










