Falta Assembly Bypoll : पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर बीते 21 मई को हुए पुनर्मतदान के बाद आज वोटों की गिनती का काम शुरू हो चुका है। इस सीट पर हुई दोबारा वोटिंग के अंतिम नतीजे आज ही स्पष्ट हो जाएंगे, जिससे प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होगा। गौरतलब है कि इस निर्वाचन क्षेत्र में पहले चरण के तहत 29 अप्रैल को मतदान संपन्न कराया गया था, लेकिन उस दौरान कई गंभीर चुनावी गड़बड़ियां और सुरक्षा चूक के मामले सामने आए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पुराना मतदान रद्द कर दिया था और पूरी सीट पर दोबारा वोटिंग कराने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया था।
पुनर्मतदान में मतदाताओं का भारी उत्साह और वोटिंग प्रतिशत
तनावपूर्ण माहौल और सुरक्षा की भारी चिंताओं के बावजूद, 21 मई को जब दोबारा मतदान हुआ तो स्थानीय जनता में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। फलता सीट के मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पोलिंग बूथों पर लंबी-लंबी कतारें नजर आईं। चुनाव आयोग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस पुनर्मतदान के दौरान फलता सीट पर एक बेहद शानदार और रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग प्रतिशत दर्ज किया गया। यहां कुल मिलाकर 86 फीसदी से भी अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो यह साफ दर्शाता है कि जनता चुनावी धांधली के खिलाफ अपने वोट की ताकत दिखाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थी।
टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान का मैदान छोड़ना और बदला समीकरण
इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में बने हुए थे। हालांकि, पुनर्मतदान की तारीख से ठीक कुछ दिन पहले उन्होंने अचानक एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए चुनावी मैदान से पीछे हटने का ऐलान कर दिया। चूंकि चुनाव प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में उनका नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न एक उम्मीदवार के तौर पर दर्ज रहा। टीएमसी नेतृत्व ने जहांगीर खान के इस फैसले से दूरी बनाते हुए इसे उनका व्यक्तिगत निर्णय करार दिया है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने फलता सीट के पूरे राजनीतिक समीकरण को बदलकर रख दिया है।
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा फलता का सियासी दंगल
आधिकारिक रिकॉर्ड की बात करें तो इस विधानसभा सीट पर कुल छह उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन सत्ताधारी दल टीएमसी के प्रत्याशी जहांगीर खान के पीछे हटने के बाद, अब मुख्य मुकाबला केवल तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच ही सिमट कर रह गया है। इस त्रिकोणीय संघर्ष में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देवांशु पांडा, कांग्रेस पार्टी के अब्दुल रजाक मोल्ला और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) के शंभू नाथ कुर्मी के बीच कांटे की टक्कर देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि त्रिकोणीय मुकाबला होने से जीत-हार का अंतर बेहद कम रह सकता है।
ईवीएम से छेड़छाड़ और वेब कैमरों की जांच के बाद पुनर्मतदान
फलता सीट पर 29 अप्रैल को हुए शुरुआती मतदान के बाद से ही पूरे क्षेत्र में भारी राजनीतिक तनाव और अशांति का माहौल बना हुआ था। मतदान के दिन कई पोलिंग बूथों से गंभीर शिकायतें मिली थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि ईवीएम के बटनों पर इत्र जैसा संदिग्ध पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगाई गई थी ताकि मतदाताओं को भ्रमित किया जा सके। इसके बाद चुनाव आयोग द्वारा कराई गई आंतरिक जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ। कई संवेदनशील मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के लिए लगाए गए वेब कैमरों के फुटेज के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई थी। इस बड़ी लापरवाही ने बूथ अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों, मतदान कर्मियों और चुनाव पर्यवेक्षकों की भूमिका को संदिग्ध बना दिया, जिसके बाद आयोग को कड़ा रुख अपनाना पड़ा।
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