इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा vs इंडक्शन: कौन है ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन?

 शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने नई टेक्नोलॉजी वाले इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हे की जानकारी X पर पोस्ट की। इस अनोखे चूल्हे के बारे में बताया गया कि यह बिना LPG या PNG कनेक्शन के बिजली से आग की लपटें पैदा कर सकता है। हालांकि इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा, इंडक्शन चूल्हे से बेहतर है? दरअसल वीडियो में बिजली से आग की लपटें पैदा करने वाली यह टेक्नोलॉजी किसी जादू से कम नहीं लगती लेकिन असल सवाल यही है कि यह तकनीक कितनी प्रैक्टिकल है? क्या यह LPG-PNG के बाद रसोई में इस्तेमाल

Wrriten By :

Editor

Published On :

अप्रैल 12, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

 शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने नई टेक्नोलॉजी वाले इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हे की जानकारी X पर पोस्ट की। इस अनोखे चूल्हे के बारे में बताया गया कि यह बिना LPG या PNG कनेक्शन के बिजली से आग की लपटें पैदा कर सकता है। हालांकि इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा, इंडक्शन चूल्हे से बेहतर है? दरअसल वीडियो में बिजली से आग की लपटें पैदा करने वाली यह टेक्नोलॉजी किसी जादू से कम नहीं लगती लेकिन असल सवाल यही है कि यह तकनीक कितनी प्रैक्टिकल है? क्या यह LPG-PNG के बाद रसोई में इस्तेमाल होने के लायक है?

गौर करने वाली बात है कि इंडक्शन के मुकाबले 10 गुना ज्यादा कीमत और बिजली के ज्यादा इस्तेमाल के चलते यह आपके बिल को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है। इसके अलावा जहां इंडक्शन चूल्हे एफिशिएंसी 90% तक होती है, वहीं प्लाज्मा चूल्हा अपनी ज्यादातर ऊर्जा रोशनी और शोर में बर्बाद कर देता है। ऐसे में नई टेक्नोलॉजी को लेकर ज्यादा उम्मीदें लगाने से पहले दोनों के फर्क को समझ लेना जरूर हो जाता है।

इंडक्शन और प्लाज्मा चूल्हे की कीमत में फर्क
इंडक्शन और प्लाज्मा चूल्हे में सबसे बड़ा फर्क कीमत को लेकर दिखता है। भारत में जहां एक अच्छा इंडक्शन चूल्हा 2500 से 4500 रुपये में खरीदा जा सकता है। वहीं नई तकनीक होने की वजह से प्लाज्मा चूल्हे की कीमत 35000-45000 रुपये तक जाती है। वहीं अगर किसी खास मॉडल को आप चीन या वियतनाम जैसे दूसरे देश से इंपोर्ट कर रहे हैं, तो प्लाज्मा चूल्हे की कीमत 60,000 रुपये तक भी पहुंच सकती है। इसके बाद इस चूल्हे की मेंटेनेंस भी इंडक्शन चूल्हे से कई गुना ज्यादा पड़ती है। इस वजह से LPG-PNG के बाद इंडक्शन चूल्हा ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन नजर आता है।(REF.)

टेक्नोलॉजी और बिजली की खपत में फर्क
अब भले इंडक्शन और इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा बिजली पर काम करते हैं लेकिन अलग-अलग टेक्नोलॉजी की वजह से इनकी बिजली की खपत और खर्च अलग-अलग पड़ता है। प्लाज्मा चूल्हा हवा को आयोनाइज करके प्लाज्मा फ्लेम बनाता है। इससे आग तो पैदा होती है, लेकिन ऊर्जा का बड़ा हिस्सा रौशनी और आवाज के रूप में बर्बाद होता है। साथ ही इसकी बर्तन में हीट ट्रांसफर करने की ताकत भी एक साधारण LPG या इंडक्शन चूल्हे के मुकाबले काफी कम होती है।

वहीं इंडक्शन चूल्हा मैग्नेटिक फील्ड से सीधा बर्तन को गर्म करता है। इसमें ऊर्जा की बर्बादी न के बराबर होती है। आसान भाषा में समझाएं, अगर आप इंडक्शन और इल्केट्रिक प्लाज्मा चूल्हे पर 1 घंटा खाना पकाएं, तो प्लाज्मा बिजली की ज्यादा खपत करते हुए महीने भर में 60-100 यूनिट तक बिजली खा सकता है। वहीं इंडक्शन इससे आधे से भी कम में खाना पका देगा।

भारतीय रसोई के लिए कौन प्रैक्टिकल
अब बात अगर भारतीय रसोई की करें, जहां ज्यादा आंच पर सब्जी, रोटी-पराठें पकाए जाते हैं। वहां इंडक्शन चूल्हा ज्यादा प्रैक्टिकल साबित होता है। दरअसल प्लाज्मा चूल्हे की खासियत है कि उसके लिए किसी खास बर्तन की जरूरत नहीं होती लेकिन प्लाजमा चूल्हे की आंच इतनी स्थिर नहीं होती कि भारतीय पकवान अच्छे से पकाए जा सकें।

 

Leave a Comment

2