Deve Gowda Reply to Kharge: संसद के गलियारों में बुधवार को उस समय एक दिलचस्प राजनीतिक संवाद देखने को मिला, जब पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेकुलर) के वरिष्ठ नेता एचडी देवेगौड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक चुटीली टिप्पणी का तीखा और तार्किक जवाब दिया। राजनीति में गठबंधन और दोस्ती के रिश्तों को लेकर अक्सर कटाक्ष किए जाते हैं, लेकिन देवेगौड़ा ने खड़गे के ‘शादी’ वाले रूपक (Metaphor) को पकड़कर कांग्रेस के साथ अपने पुराने कड़वे अनुभवों को सार्वजनिक कर दिया। इस बयान ने कर्नाटक की राजनीति से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।
खड़गे का मजाकिया तंज: “प्यार कांग्रेस से और शादी मोदी जी से”
विवाद की शुरुआत राज्यसभा में सांसदों के विदाई समारोह के दौरान हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने पुराने मित्र देवेगौड़ा की ओर इशारा करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था, “देवेगौड़ा जी पहले कांग्रेस से ‘प्यार’ करते थे, लेकिन अंततः उन्होंने मोदी जी (भाजपा) के साथ ‘शादी’ कर ली। मुझे अभी तक इस अचानक हुए हृदय परिवर्तन का असली कारण समझ नहीं आया।” खड़गे के इस मजाकिया अंदाज पर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा था, लेकिन देवेगौड़ा ने इसे केवल एक चुटकुले के रूप में नहीं लिया और विस्तार से अपनी स्थिति स्पष्ट की।
देवेगौड़ा का पलटवार: “कांग्रेस के साथ रिश्ता एक अपमानजनक मजबूरी थी”
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। देवेगौड़ा ने खड़गे की ही शब्दावली का उपयोग करते हुए कहा, “अगर मुझे अपने मित्र को शादी की भाषा में ही जवाब देना हो, तो मैं यह कहूंगा कि कांग्रेस के साथ मेरा गठबंधन कोई प्रेम संबंध नहीं, बल्कि एक ‘मजबूरी की शादी’ थी।” उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि यह रिश्ता इतना अपमानजनक और घुटन भरा हो गया था कि उन्हें ‘तलाक’ लेने के अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आया। देवेगौड़ा ने संकेत दिया कि कांग्रेस के साथ रहने के दौरान उनके आत्मसम्मान को बार-बार ठेस पहुँचाई गई।
गठबंधन टूटने का असली कारण: “मैंने नहीं, कांग्रेस ने छोड़ा मेरा साथ”
अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि क्षेत्रीय दलों ने सत्ता के लालच में कांग्रेस का साथ छोड़ा, लेकिन देवेगौड़ा ने इस नैरेटिव को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह कहना गलत है कि मैंने कांग्रेस गठबंधन छोड़ा। वास्तविकता यह है कि वे ही मुझसे दूर चले गए। उनके व्यवहार और कार्यशैली ने मुझे उनसे अलग होने और एक अधिक स्थिर गठबंधन तलाशने के लिए मजबूर कर दिया।” देवेगौड़ा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के भीतर क्षेत्रीय दलों के प्रति सम्मान की कमी और अस्थिरता ही उनके अलगाव की मुख्य वजह बनी।
भाजपा से गठबंधन पर सफाई: स्थिरता और विकास की तलाश
भाजपा के साथ अपने वर्तमान गठबंधन पर बात करते हुए जेडीएस अध्यक्ष ने कहा कि राजनीति में स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने खड़गे को याद दिलाया कि जब कांग्रेस के साथ उनका रिश्ता ‘टॉक्सिक’ (विषैला) हो गया था, तब उन्होंने देश और राज्य के हित में एक ऐसा साथी चुना जो विकास और स्थिरता की गारंटी देता हो। देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए यह संदेश दिया कि उनकी ‘नई शादी’ यानी भाजपा के साथ गठबंधन किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि साझा लक्ष्यों और आपसी सम्मान के आधार पर हुआ है।
निष्कर्ष: संसद में पुरानी दोस्ती और नई राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता
देवेगौड़ा और खड़गे दोनों ही कर्नाटक की राजनीति के दिग्गज स्तंभ हैं और उनके बीच दशकों पुरानी व्यक्तिगत मित्रता है। हालांकि, संसद में हुआ यह संवाद दर्शाता है कि व्यक्तिगत संबंधों के बावजूद राजनीतिक विचारधाराएं और गठबंधन की मजबूरियां अब काफी बदल चुकी हैं। देवेगौड़ा का ‘तलाक’ वाला बयान कांग्रेस के लिए एक आईना है कि कैसे उसके पुराने सहयोगी अब उससे किनारा कर रहे हैं। आने वाले चुनावों में यह ‘शादी और तलाक’ का मुद्दा कर्नाटक की जमीन पर और भी गरमा सकता है।
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