Delimitation Bill: संसद में प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अलग-अलग दल इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं। इसी बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके के इस बिल को समर्थन देने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि जो भी दल इस बिल का समर्थन करेगा, वह तमिलनाडु के हितों के साथ धोखा करेगा। अब समाजवादी पार्टी ने भी परिसीमन को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
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सपा ने पूछा- बढ़ी संख्या में सांसदों की भूमिका क्या होगी?
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने परिसीमन बिल पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा हुआ है।उन्होंने कहा कि अगर परिसीमन के बाद लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ती है और राज्यों की विधानसभाओं में विधायकों की संख्या बढ़ती है, तो यह देखना जरूरी होगा कि मौजूदा जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का कितना अवसर मिल रहा है। सपा प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सांसद हैं, लेकिन क्या सभी सांसदों को सदन में अपने क्षेत्र और जनता से जुड़े मुद्दों को पूरी तरह उठाने का पर्याप्त मौका मिल पाता है, यह बड़ा सवाल है।
सपा बोली- सिर्फ सीटें बढ़ाना समाधान नहीं
फखरुल हसन चांद ने कहा कि लोकतंत्र में केवल सदस्यों की संख्या बढ़ाना जरूरी नहीं है, बल्कि जरूरी यह है कि हर सांसद और विधायक को प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि कई बार संसद के सत्रों में सभी सांसदों को बोलने का पूरा समय नहीं मिल पाता। ऐसे में यदि सदन का आकार और बढ़ जाता है तो छोटे प्रतिनिधियों की आवाज दबने की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की समस्याओं और क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने के लिए प्रतिनिधियों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
बीजेपी पर सपा ने लगाए राजनीतिक लाभ लेने के आरोप
सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि परिसीमन प्रक्रिया के जरिए भारतीय जनता पार्टी राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी उन क्षेत्रों में सीटों की संख्या बढ़ाना चाहती है, जहां उसका प्रभाव अधिक है, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर अलग स्थिति दिखाई दे रही है। सपा का कहना है कि परिसीमन से जुड़े कई ऐसे पहलू हैं, जिन पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श की जरूरत है।
परिसीमन बिल के विरोध में सपा
समाजवादी पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह परिसीमन बिल का विरोध कर रही है। पार्टी का मानना है कि इस प्रक्रिया से राज्यों के प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से इस बिल को लेकर अभी आगे की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। संसद में इसे लेकर आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
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क्या है परिसीमन का मुद्दा?
परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या का पुनर्निर्धारण करना होता है। यह प्रक्रिया जनसंख्या और अन्य संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर की जाती है। हालांकि, इस मुद्दे पर राज्यों के बीच अलग-अलग राय सामने आती रही है। कुछ दल इसे बेहतर प्रतिनिधित्व का जरिया मानते हैं, जबकि कुछ राजनीतिक दलों को इससे क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित होने की चिंता है।










