Delhi News: महंगाई के बीच दिल्लीवासियों पर नया बोझ, बिजली बिल होगा और महंगा

दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, जिसके बाद राजधानी में 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दरें 1 से 3.30 फीसदी तक बढ़ जाएंगी।

Delhi News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 13, 2026

Delhi News: भीषण गर्मी और बढ़ती महंगाई के बीच देश की राजधानी दिल्ली के नागरिकों के लिए बिजली बिल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC – Delhi Electricity Regulatory Commission) ने बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge/PPAC) बढ़ाने की मांग की गई थी। आयोग की इस हरी झंडी के बाद अब दिल्ली के उन उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा जो भारी मात्रा में बिजली का उपभोग करते हैं।

हालांकि, इस पूरे फैसले में दिल्ली के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर भी शामिल है, क्योंकि आयोग ने इस बढ़ोतरी का दायरा बेहद सोच-समझकर तय किया है।

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500 यूनिट तक कोई अतिरिक्त बोझ नहीं

दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने आम जनता के हितों और घरेलू बजट का ध्यान रखते हुए एक सुरक्षा कवच तैयार किया है। राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि जिन घरेलू उपभोक्ताओं की मासिक बिजली खपत 500 यूनिट या उससे कम है, उन्हें इस बढ़ी हुई दर का एक भी अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा। डीईआरसी के अधिकारियों के अनुसार, आम नागरिकों को इस महंगाई से पूरी तरह बाहर रखने के लिए ही 500 यूनिट तक की सीमा तय की गई है। इस फैसले से दिल्ली की एक बहुत बड़ी आबादी (विशेषकर मध्यम वर्ग) के मासिक बजट पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

500 यूनिट पार करते ही जेब होगी ढीली

इस नए आदेश का सबसे ज्यादा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जिनकी मासिक बिजली की खपत 500 यूनिट की सीमा को पार कर जाती है। गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर (AC) और अन्य उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण कई बड़े घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली की खपत बढ़ जाती है।

नए फैसले के मुख्य बिंदु

500 यूनिट से अधिक बिजली का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए बिजली की दरों में 1 फीसदी से लेकर 3.30 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिलेगा। दिल्ली सरकार द्वारा मिलने वाली बिजली सब्सिडी का लाभ उठा रहे उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर नहीं होगा। इसमें वे सभी उपभोक्ता शामिल हैं जिनकी मासिक खपत 200 से 500 यूनिट के बीच रहती है और वे तय नियमों के तहत छूट का लाभ ले रहे हैं।

क्यों लिया गया यह फैसला? बिजली उत्पादन की बढ़ती लागत है वजह

नियामक आयोग और ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यह कोई मनमाना फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस आर्थिक और तकनीकी कारण हैं। पिछले कुछ समय में वैश्विक और घरेलू स्तर पर बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले कोयले और गैस जैसे प्राथमिक ईंधनों (Primary Fuels) की लागत में भारी वृद्धि हुई है।

उत्पादन और आपूर्ति का संतुलन

बिजली उत्पादन कंपनियों (Gencos) द्वारा डिस्कॉम्स को बेची जाने वाली बिजली की दरें बढ़ने के कारण वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा था। इसी उत्पादन लागत (Power Purchase Cost) की भरपाई करने के लिए डीईआरसी ने बेहद सीमित दायरे में इस फ्यूल सरचार्ज को बढ़ाने की अनुमति दी है, ताकि दिल्ली में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

इस नए फैसले के लागू होने के बाद अब दिल्ली के बड़े उपभोक्ताओं और वाणिज्यिक श्रेणी के लोगों को अपने बिजली खर्च और उपकरणों के उपयोग को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा, ताकि वे बढ़े हुए बिल के झटके से बच सकें।

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