Delhi JNU UGC Protest: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रों द्वारा शिक्षा मंत्रालय तक ‘लांग मार्च’ निकालने की कोशिश के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हो गई। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर हालात तनावपूर्ण बने, दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने हमला किया, जबकि छात्रों का आरोप है कि उनके खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया गया।
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गिरफ्तार छात्रों में प्रमुख पदाधिकारी शामिल

इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें जेएनयू छात्र संघ के कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार, मौजूदा अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका बाबू और संयुक्त सचिव दानिश अली के नाम शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि स्थिति बिगड़ने के कारण कुछ छात्रों को हिरासत में लेना जरूरी हो गया था। छात्र संगठन इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं।
मार्च की पृष्ठभूमि और विवाद
छात्र संघ ने मार्च की योजना कुलपति की हालिया टिप्पणियों के विरोध में बनाई थी। कुलपति ने एक पॉडकास्ट में यूजीसी मानदंडों के लागू करने, छात्र संघ पदाधिकारियों के निलंबन और प्रस्तावित रोहित अधिनियम पर बात की थी। इसके बाद छात्र विरोध में आ गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि परिसर के बाहर किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है और छात्रों को विश्वविद्यालय के भीतर ही विरोध करने की सलाह दी गई थी।
झड़प का विवरण
पुलिस के अनुसार, लगभग 400-500 छात्र दोपहर में परिसर में जमा हुए। करीब 3 बजकर 20 मिनट पर छात्र मुख्य गेट की ओर बढ़े और बाहर निकलने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छात्र बैरिकेड तोड़ने लगे और बैनर, लाठियां तथा जूते फेंके। इसके चलते कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें आईं और कुछ को दांत से काटा गया। बाद में पुलिस ने छात्रों को नॉर्थ गेट के पास रोककर धीरे-धीरे वापस परिसर के अंदर धकेल दिया।
छात्रों का आरोप: जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग
छात्रों का कहना है कि पुलिस ने उनके खिलाफ अत्यधिक सख्ती दिखाई। लाठीचार्ज और अन्य कार्रवाई में कई छात्र-छात्राएं घायल हुए। कुछ छात्रों का दावा है कि हिरासत में लिए गए लोगों को अपुष्ट स्थानों पर ले जाया गया। छात्र संघ का कहना है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण था और उन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित किया गया।
शिक्षक संघ ने जताई नाराजगी
JNU शिक्षक संघ ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है। शिक्षक संघ ने कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग करना गलत है और हिरासत में लिए गए छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने तुरंत रिहाई की मांग की और छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया।
पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार
पुलिस ने छात्रों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मौके पर सभी कर्मी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम कर रहे थे। उनका दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह हालात को नियंत्रित करने के लिए की गई।
वर्तमान में विश्वविद्यालय परिसर में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। छात्र संगठन आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं, जबकि पुलिस स्थिति पर निगरानी रखे हुए है। यह मामला अब सिर्फ मार्च तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्र संघ और सरकार के बीच बढ़ते टकराव की तस्वीर भी उजागर कर रहा है।









