Codeine Smuggling Case: प्रतिबंधित नशीली दवा कोडिन युक्त कफ सिरप की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस अवैध धंधे के मास्टरमाइंड और एक लाख रुपये के इनामी अपराधी शुभम जायसवाल समेत तीन मुख्य आरोपियों को अदालत द्वारा आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया गया है। एसटीएफ की जांच टीम में शामिल इंस्पेक्टर अंजनी कुमार पांडेय ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में तीनों फरार अपराधियों के खिलाफ एक नई एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है।
दुबई में ठिकाना
एसटीएफ द्वारा जुटाई गई खुफिया जानकारियों के मुताबिक, मुख्य सरगना शुभम जायसवाल, उसका साथी वरुण सिंह और गौरव जायसवाल इस समय भारत छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) में छिपे हुए हैं। कानून के शिकंजे से बचने के लिए वे लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं। अदालत द्वारा इन तीनों के खिलाफ पूर्व में ही लुकआउट सर्कुलर (Lookout Notice) और गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद ये अंतरराष्ट्रीय स्तर के आरोपी भारतीय अदालत के समक्ष पेश होने से लगातार कतरा रहे हैं।
कुर्की की विधिक कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचक इंस्पेक्टर अंजनी कुमार पांडेय ने बताया कि अदालत के निर्देशों की अवहेलना करने पर अब तीनों भगोड़ों के खिलाफ विधिक रूप से कुर्की (Property Attachment) की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। गौरतलब है कि इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 8 अप्रैल 2024 को पहला मुकदमा दर्ज किया गया था। अपराध की गंभीरता और अंतरराज्यीय नेटवर्क को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने इस संवेदनशील मामले की पूरी जांच एसटीएफ को सौंप दी थी।
अंतरराज्यीय मादक पदार्थ नेटवर्क
अब तक की पुलिस तफ्तीश और जांच-पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन आरोपियों ने भारत के कई राज्यों में कोडिन युक्त कफ सिरप (CBCS) की बड़े पैमाने पर तस्करी का एक मजबूत और संगठित सिंडिकेट खड़ा कर रखा था। जब एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ अपनी कानूनी कार्रवाई तेज की, तो भनक लगते ही कानून की गिरफ्त से बचने के लिए ये तीनों शातिर तस्कर देश की सीमाएं लांघकर रातों-रात दुबई फरार हो गए।
अदालती आदेशों की अवहेलना
मादक पदार्थों की इस गंभीर तस्करी के मामले में चार फरवरी 2026 को माननीय न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों फरार आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था। इसके बाद कानूनी माध्यमों से इन्हें कई बार अदालत में हाजिर होने और जांच में सहयोग करने के कड़े निर्देश दिए गए, लेकिन कानून को ठेंगा दिखाते हुए ये तीनों आरोपी अब तक भारत वापस नहीं लौटे हैं।
सिंडिकेट पर पहले भी हुआ है प्रहार
इस पूरे ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एसटीएफ और पुलिस पहले भी कई बड़ी गिरफ्तारियां कर चुकी है। पुलिस ने मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता भोला को पहले ही सलाखों के पीछे भेज दिया है। इसके अलावा, इस काले कारोबार में शामिल पुलिस महकमे के बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और उसके बेहद करीबी सहयोगी अमित टाटा समेत गिरोह के कुल 18 सक्रिय सदस्यों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। शेष बचे मास्टरमाइंड्स को भी जल्द कानून के दायरे में लाने की कोशिश जारी है।










