Congress Reaction: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से गरमाई सियासत, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देर से उठाया गया अधूरा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला पहले होना चाहिए था, लेकिन आखिरकार इस मुद्दे से छुटकारा मिल गया।

Congress Reaction

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 25, 2026

Congress Reaction: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के उग्र आंदोलन और विपक्ष के चौतरफा दबाव के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। मंत्री के इस इस्तीफे के बाद कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस ने इसे युवाओं के संघर्ष और सत्य की बड़ी जीत करार दिया है, वहीं सरकार की नीयत और कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे: “यह मोदी जी के हठ की हार है”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए कड़ा संदेश दिया। उन्होंने इसे देश के छात्रों और युवाओं के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया।

खरगे ने तंज कसते हुए लिखा, “भारत के छात्रों की गूंज आखिरकार अहंकारी सत्ता की दहलीज तक पहुंच गई। यह मोदी जी के हठ की हार है।” उन्होंने इस जीत को उन पीड़ित परिवारों को समर्पित किया जिन्होंने इस भ्रष्ट परीक्षा तंत्र में अपने अपनों को खोया है। इसके साथ ही, खड़गे ने दो टूक मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की युवा पीढ़ी से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे छात्रों पर लाठी-डंडे और पैलेट गन चलवाने वाले जिम्मेदार लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

पवन खेड़ा और अधीर रंजन चौधरी के तीखे प्रहार

कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस इस्तीफे को सरकार की मजबूरी बताया है:

पवन खेड़ा का बयान: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस फैसले को नाकाफी और बेहद देरी से उठाया गया कदम बताया। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “काफी देर से उठाया गया अधूरा कदम (A day late and a dollar short)। लेकिन आखिरकार इस बला से छुटकारा मिला। भारत के लोगों को हार्दिक बधाई।”

अ अधीर रंजन चौधरी की तीखी प्रतिक्रिया: वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सरकार की टाइमिंग और उसकी नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर यह फैसला बहुत पहले ले लिया जाता, तो छात्रों पर होने वाले अत्याचारों से बचा जा सकता था। चौधरी ने कहा, “अगर ऐसा पहले ही कर दिया जाता, तो पैलेट गन, आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सकता था। अब मुझे लगता है कि घबराहट में सरकार ने अपने ही मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए खुद को मजबूर पाया है।”

‘व्यक्तिगत प्रतिष्ठा’ का विषय नहीं – धर्मेंद्र प्रधान

लाखों छात्रों के भविष्य और सड़कों पर मचे बवाल के बीच, शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपना इस्तीफा देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके लिए ‘व्यक्तिगत प्रतिष्ठा’ का विषय नहीं है। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि पिछले 10 दिनों में देश के अंदर जो भी अप्रिय घटनाक्रम सामने आए हैं, उसने उन्हें अंदर से विचलित कर दिया है।

शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भले ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया हो, लेकिन नीट परीक्षा विवाद (NEET Controversy) और परीक्षा तंत्र की कमियों पर देश का युवा अभी भी जवाब मांग रहा है। विपक्षी पार्टियां इसे सरकार की नैतिकता नहीं बल्कि उसकी मजबूरी और घबराहट बता रही हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि इस बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक डैमेज को कंट्रोल करने के लिए सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

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