Cocktail 2 Review: साल 2012 में आई होमी अदजानिया की ‘कॉकटेल’ आज भी दर्शकों के दिलों में एक खास जगह रखती है। सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण और डायना पेंटी के उलझे रिश्तों, गलतियों और उनके सच्चे अहसासों ने फिल्म को यादगार बनाया था। अब 14 साल बाद होमी अदजानिया इसके ‘स्पिरिचुअल सीक्वल’ के रूप में ‘कॉकटेल 2’ लेकर आए हैं। इस बार स्क्रीन पर शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की तिकड़ी है। मेकर्स भले ही इसे नई कहानी कहकर तुलना न करने की सलाह दें, लेकिन जब नाम और फॉर्मूला वही हो, तो तुलना लाजिमी है। बदकिस्मती से, यह नई बोतल पुरानी शराब जैसी भी नहीं है; इसमें से भावनाओं का ‘अल्कोहल’ पूरी तरह गायब है और यह सिर्फ एक फीका मॉकटेल बनकर रह गई है।
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कहानी: रफ्तार में खो गए रिश्तों के अहसास
फिल्म की कहानी कुणाल (शाहिद कपूर), दिया (रश्मिका मंदाना) और एली (कृति सेनन) के त्रिकोण पर आधारित है। कुणाल और दिया लंबे समय से रिलेशनशिप में हैं, लेकिन वक्त के साथ उनके रिश्ते का रोमांच खत्म हो चुका है। दिया, कुणाल के प्यार को परखने के लिए अपनी जिंदगी में एली की एंट्री करवाती है। यहीं से कहानी बिखरना शुरू होती है।
एली को कुणाल से महज दो दिन में सच्चा प्यार हो जाता है। पटकथा इतनी जल्दबाजी में है कि किरदारों के बीच गहराव और भावनाओं को पनपने का मौका ही नहीं मिलता। पर्दे पर झगड़े होते हैं, लोग रोते हैं, लेकिन दर्शक उनसे जुड़ नहीं पाते। फिल्म जबरदस्ती दर्शकों को भावुक करने की कोशिश करती है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले के कारण दिल गवाही नहीं देता।
अभिनय: शाहिद की ओवरएक्टिंग और रश्मिका का कमजोर लहजा
शाहिद कपूर एक बेहतरीन अभिनेता हैं, लेकिन इस फिल्म में वह जरूरत से ज्यादा कोशिश करते दिखते हैं। हल्के-फुल्के दृश्यों में उनकी कॉमेडी जबरदस्ती की लगती है और इमोशनल सीन्स में उनकी आंखों से ज्यादा उनके चेहरे पर तनाव नजर आता है, जो कई जगह ओवरएक्टिंग की श्रेणी में चला जाता है।
रश्मिका मंदाना फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई हैं। उनके किरदार को मासूम दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन उनका हिंदी लहजा (Accent) इतना अटपटा है कि गंभीर दृश्य भी मजाकिया लगने लगते हैं। कृति के स्क्रीन प्रेजेंस के सामने रश्मिका का किरदार पूरी तरह दबा हुआ नजर आता है।
कृति सेनन: नई ‘वेरोनिका’ बनने की अधूरी कोशिश
फिल्म में कृति सेनन के किरदार ‘एली’ को पहली फिल्म की ‘वेरोनिका’ (दीपिका पादुकोण) की तर्ज पर गढ़ने की कोशिश की गई है। पहली फिल्म में वेरोनिका का किरदार ग्लैमरस होने के साथ-साथ भीतर से टूटा हुआ और बेहद सच्चा था। इसके उलट, कृति का किरदार ग्लैमरस, कॉन्फिडेंट और चालाक तो है, लेकिन उसमें भावनात्मक गहराई शून्य है। पूरी फिल्म में कपड़ों और फैशन ब्रांड्स का प्रदर्शन इतना ज्यादा है कि यह कहानी कम और किसी लक्जरी ब्रांड का विज्ञापन ज्यादा लगती है।
सपोर्टिंग कास्ट में टीकू तलसानिया और नीलू कोहली जैसे मंझे हुए कलाकारों को सिर्फ फ्रेम भरने के लिए रखा गया है। वहीं, पुलकित सम्राट का कैमियो भी कहानी में कोई नया मोड़ लाने में नाकाम रहता है।
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