Coal Scam: कोयला घोटाला मामलों में SC का बड़ा कदम, जानें क्यों हटाए गए दो जज

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के विशेष अनुरोध को स्वीकार करते हुए कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीशों—सुनैना शर्मा और धीरज मोर—को उनके पदों से हटा दिया है

Coal Scam

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 8, 2026

Coal Scam: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय (High Court) के एक असामान्य और विशेष अनुरोध पर बड़ा कदम उठाते हुए कोयला घोटाला (Coal Scam) मामलों की सुनवाई कर रहे दो विशेष सत्र न्यायाधीशों को उनके पद से हटा दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद न्यायिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने पत्र में दलील दी थी कि ये दोनों न्यायाधीश अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक या न्यायिक जिम्मेदारियों के लिए अधिक उपयुक्त हैं, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने यह बदलाव मंजूर कर लिया है।

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छोटे कार्यकाल के बाद हुआ जजों का तबादला

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने इस आदेश को दर्ज किया। दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए पत्र में दोनों न्यायिक अधिकारियों—सुनैना शर्मा और धीरज मोर—की प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘उत्कृष्ट योग्यता’ वाला बताया गया था। पत्र में कहा गया था कि उच्च न्यायालय उनकी सेवाओं का उपयोग अन्य स्थानों पर करना चाहता है।

गौरतलब है कि इन दोनों जजों का कार्यकाल काफी छोटा रहा है:

न्यायाधीश सुनैना शर्मा: उन्होंने इसी साल जनवरी में ही कोयला घोटाला मामलों की विशेष अदालत का पदभार संभाला था, यानी उन्हें अपने पद पर आए अभी बमुश्किल छह महीने ही हुए थे।

न्यायाधीश धीरज मोर: इन्हें अप्रैल 2025 में विशेष न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और इन्होंने लगभग एक साल का ही कार्यकाल पूरा किया था।

पूर्व न्यायाधीश संजय बंसल: इससे पहले तत्कालीन पीठासीन जज संजय बंसल ने लगभग साढ़े चार साल तक इस विशेष अदालत की अध्यक्षता की थी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से ही कार्यमुक्त किया गया था।

नए जजों की हुई नियुक्ति और वर्तमान स्थिति

दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए शीर्ष अदालत ने सुनैना शर्मा और धीरज मोर को उनके पदों से हटाने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उनकी जगह दो नए जजों की नियुक्ति का रास्ता भी साफ हो गया है:

वीरेंद्र कुमार खर्ता (जो पहले साकेत कोर्ट में एनडीपीएस अदालत के विशेष न्यायाधीश थे) अब सुनैना शर्मा की जगह लेंगे।

अजय गर्ग (जो पहले तीस हजारी कोर्ट में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश थे) अब धीरज मोर का पदभार संभालेंगे।

हालांकि, इस तबादले से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि फिलहाल सुनैना शर्मा और धीरज मोर दोनों में से किसी को भी कोई नई नियमित न्यायिक पोस्टिंग नहीं दी गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार, दोनों अधिकारियों को फिलहाल प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सीबीआई) के कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।

सुरक्षित रखे गए फैसलों को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश

तबादले की इस प्रक्रिया के बीच मुकदमों की सुनवाई और न्याय प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसके लिए हाईकोर्ट ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। उच्च न्यायालय ने दोनों अधिकारियों को यह आदेश दिया है कि वे कार्यभार छोड़ने से पहले उन सभी मामलों को स्पष्ट रूप से अधिसूचित करें, जिनमें सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसले या आदेश सुरक्षित रखे गए हैं।

भले ही उनका तबादला कर दिया गया हो, लेकिन उन्हें नियत तारीख पर या अधिकतम दो से तीन सप्ताह के भीतर उन सुरक्षित फैसलों को सुनाना होगा। इसके अलावा, इन फैसलों की तिथियों को पुरानी और नई दोनों अदालतों की कॉज लिस्ट के साथ-साथ आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है। पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन दो विशेष अदालतों के पास सीबीआई भ्रष्टाचार के 29 मामले लंबित थे, जबकि 27 से अधिक मामलों का निपटारा पहले ही किया जा चुका है।

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