CJP Protest Row: CJP प्रोटेस्ट को पाकिस्तान के Gen-Z का समर्थन, भारत सरकार ने दिया कड़ा जवाब

CJP प्रोटेस्ट को पाकिस्तान के Gen-Z समूहों से समर्थन मिलने के बाद मामला अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। भारत सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रतिक्रिया दी है। आखिर इस प्रदर्शन को लेकर विवाद क्यों बढ़ा, पाकिस्तान से समर्थन का क्या मतलब है और भारत ने क्या कहा, जानिए पूरी रिपोर्ट।

CJP Protest Row

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 29, 2026

CJP Protest Row : दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान के कुछ Gen Z समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर जताए गए समर्थन के बाद भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर ध्यान देने के बजाय अपने यहां से संचालित राज्य समर्थित सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सरकार का कहना है कि भारत के लोकतांत्रिक मुद्दों पर टिप्पणी करने से पहले पाकिस्तान को अपनी नीतियों और गतिविधियों की समीक्षा करनी चाहिए। विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील मुद्दों को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है।

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर घेरा

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान कई दशकों से भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित आतंकवादी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करे। उनके अनुसार, यदि पाकिस्तान वास्तव में क्षेत्र में शांति चाहता है तो उसे सबसे पहले आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम उठाने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह संदेश केवल सरकारों तक ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के युवाओं और समाज तक भी पहुंचना चाहिए।

Gen Z के समर्थन से जुड़े सवाल पर दिया जवाब

प्रेस वार्ता के दौरान रणधीर जायसवाल से उन खबरों के बारे में सवाल पूछा गया, जिनमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान के कुछ युवाओं ने दिल्ली और अन्य शहरों में हुए छात्र प्रदर्शनों के समर्थन में सोशल मीडिया पर संदेश साझा किए हैं। इस पर उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिक चिंता सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान के युवा या अन्य वर्ग वास्तव में शांति और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्षधर हैं, तो उन्हें भी आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने इस विषय पर किसी विस्तृत टिप्पणी से बचते हुए अपना मुख्य फोकस आतंकवाद के मुद्दे पर रखा।

पाकिस्तान ने प्रदर्शनों को भारत का आंतरिक मामला बताया

इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत में चल रहे छात्र प्रदर्शनों पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान ऐसे विषयों पर टिप्पणी नहीं करता। हालांकि, इसके बावजूद सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के कुछ युवाओं ने भारतीय प्रदर्शनकारियों के समर्थन में संदेश साझा किए। कुछ पोस्ट में दोनों देशों के साझा इतिहास और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया गया, जिससे यह विषय सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया।

सिंधु घाटी सभ्यता के दावों पर भी भारत का जवाब

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान द्वारा सिंधु घाटी सभ्यता की साझा विरासत को लेकर किए गए हालिया दावों पर भी सवाल पूछा गया। इस पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि आतंकवाद और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े पाकिस्तान के रिकॉर्ड को देखते हुए ऐसे दावे विश्वसनीय नहीं माने जा सकते। उन्होंने कहा कि कोई भी देश, जो लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और धार्मिक कट्टरता को संरक्षण देने के आरोपों का सामना कर रहा हो, वह बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत पर प्रभावी दावा नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड गंभीर सवालों के घेरे में रहा है।

पाकिस्तानी मंत्री के बयान से बढ़ी बहस

हाल ही में पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने सिंधु घाटी सभ्यता को पाकिस्तान की राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर नई बहस शुरू हो गई। भारत की ओर से इस विषय पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया देते हुए यह संकेत दिया गया कि सांस्कृतिक विरासत का सम्मान तभी सार्थक है, जब किसी देश का व्यवहार शांति, सह-अस्तित्व और मानवाधिकारों के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध हो।

सिंधु जल संधि और आतंकवाद का भी हुआ उल्लेख

विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग के दौरान हालिया घटनाक्रम का जिक्र करते हुए यह भी बताया गया कि पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया था। उस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय समझौतों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। सरकार का कहना है कि जब तक आतंकवाद के मुद्दे पर ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं होती, तब तक दोनों देशों के संबंधों में सामान्य स्थिति की उम्मीद करना कठिन होगा। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय शांति और सहयोग के लिए आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

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