CJP Protest: देश भर में प्रदर्शनकारियों और छात्रों पर की जा रही पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से हाल ही में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ तीखी नाराजगी जताते हुए सरकार को एक सख्त अल्टीमेटम दिया गया था, जिसके बाद अब सरकार ने इस पूरे मामले का गंभीर संज्ञान लिया है। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार उन सभी राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर रही है जहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों या छात्रों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
CJP का अल्टीमेटम और सरकार पर समझौते के उल्लंघन का आरोप
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्र सरकार के मंत्रियों—जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए एक तीखा सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने विशेष रूप से बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों की अंधाधुंध गिरफ्तारी, तथा दिल्ली और उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा मारे जा रहे छापों का कड़ा हवाला दिया।
सीजेपी प्रवक्ता ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीट (NEET) आंदोलन को समाप्त करने के लिए पहले जो आपसी समझौता तय हुआ था, सरकार और उसकी एजेंसियां उसका पूरी तरह से उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और बंगाल में सैकड़ों की संख्या में छात्रों को हिरासत में लिया गया है, जबकि दिल्ली व अन्य राज्यों में आंदोलनकारियों और उनकी मदद करने वाले वॉलंटियर्स को लगातार परेशान किया जा रहा है और उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
एफआईआर वापस लेने और लिखित समझौते की मांग
प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार के सामने अपनी शर्तें रखते हुए चेतावनी दी है कि यदि तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति फिर से बिगड़ सकती है। CJP की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
मुकदमे वापस लें: प्रदर्शनकारियों और छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई सभी पुलिस एफआईआर (FIR) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
तुरंत रिहाई: हिरासत में लिए गए सभी युवाओं और छात्रों को बिना किसी शर्त के रिहा किया जाए।
भविष्य की सुरक्षा: दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और बीजेपी शासित राज्यों की पुलिस द्वारा भविष्य में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया जाए।
लिखित समझौता: सीजेपी ने मांग की है कि कानूनी सुरक्षा और मामलों से संबंधित एक लिखित समझौते की कॉपी मंगलवार तक उनके साथ साझा की जाए।
देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनकी इन सभी मांगों को नहीं माना गया और छात्रों के खिलाफ हो रही कार्यवाहियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे एक बार फिर से देशव्यापी स्तर पर धरना देने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि सरकार इस अल्टीमेटम के जवाब में क्या ठोस कदम उठाती है।
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