E20 Janta Party: E20 पेट्रोल से बर्बाद हो रहे हैं गाड़ियों के इंजन? सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही ‘E20 जनता पार्टी’ की सरकार को दो टूक चेतावनी

नीट पेपर लीक पर 'कॉकरोच आंदोलन' की सफलता के बाद सोशल मीडिया पर 'E20 जनता पार्टी' का डिजिटल कैंपेन तेजी से उभर रहा है। यह नया समुदाय एथनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के विरोध में उतरा है, जो 100% शुद्ध ईंधन चुनने की आजादी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

E20 Janta Party

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 27, 2026

E20 Janta Party: देश में जेन-जी (Gen Z) युवाओं द्वारा नीट पेपर लीक के मुद्दे पर दिखाई गई अनोखी और बेमिसाल एकता यानी ‘कॉकरोच’ आंदोलन की भारी सफलता के बाद, अब सोशल मीडिया पर एथनॉल मिश्रित ईंधन (Ethanol-Blended Fuel) के विरोध में एक नया और आक्रामक डिजिटल समुदाय तेजी से उभर रहा है। ‘E20 जनता पार्टी’ नाम से शुरू हुआ यह नया संगठन ठीक उसी तर्ज पर तैयार किया गया है जिसने कुछ समय पहले देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। यह पूरा डिजिटल अभियान उस व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन से प्रेरित है जो भारत के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था और देखते ही देखते NEET पेपर लीक के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े देशव्यापी आंदोलन में बदल गया था।

फॉलोअर्स की संख्या में तेजी से हो रहा इजाफा

बताते चले कि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से इंस्टाग्राम और ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर ‘E20 जनता पार्टी’ को लेकर युवाओं और वाहन चालकों में जबर्दस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। इस तथाकथित डिजिटल पार्टी के फॉलोअर्स की संख्या कुछ ही दिनों में बढ़कर 2,20,000 के आंकड़े को पार कर चुकी है और यह संख्या लगातार रॉकेट की गति से बढ़ रही है। इस ऑनलाइन समुदाय का मुख्य रूप से यह कहना है कि वे देश के आम नागरिकों और वाहन मालिकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। चूंकि पेट्रोल पंपों पर अब मुख्य रूप से एथनॉल मिश्रित ईंधन ही मिल रहा है, इसलिए लोग इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी भड़ास निकाल रहे हैं और सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग के साथ केंद्र सरकार की नीति पर उठे सवाल

इस नए डिजिटल आंदोलन की सबसे बड़ी मांग यह है कि देश के उपभोक्ताओं को कम कीमत पर 100% असली और शुद्ध ईंधन चुनने की पूरी आजादी दी जानी चाहिए। इसके साथ ही, इस कैंपेन के तहत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की भी मांग उठाई जा रही है, जिन्हें E20 ईंधन नीति को लेकर इस व्यापक डिजिटल विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए दो टूक कह दिया है कि बिना मिश्रण वाले पुराने मानक के ईंधन पर वापस लौटने का फिलहाल सरकार का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, क्योंकि यह देश के दीर्घकालिक आर्थिक और पर्यावरणीय हितों के अनुकूल है।

माइलेज में कमी के दावों पर सरकार और आलोचकों के बीच छिड़ी तीखी बहस

वर्तमान में भारत में मिलने वाले पेट्रोल को E20 कहा जाता है क्योंकि इसमें 20% एथनॉल मिलाया जाता है। सरकार इसे पर्यावरण के अनुकूल और तकनीकी रूप से एक उन्नत ईंधन बताती है जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है। हालांकि, इसके विपरीत आलोचकों और वाहन मालिकों का कड़ा दावा है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज काफी कम हो जाता है और आधुनिक व पुराने दोनों प्रकार के इंजनों को भारी नुकसान पहुंचता है। इसके जवाब में सरकार का आधिकारिक कहना है कि यह ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी प्रयोगशाला परीक्षण से यह बात साबित नहीं हुई है कि इससे इंजन को व्यापक नुकसान होता है। हालांकि, सरकार ने यह जरूर माना है कि E10 के अनुकूल पुरानी गाड़ियों में E20 ईंधन डालने पर माइलेज में 3 से 5 फीसदी तक की हल्की गिरावट आ सकती है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली प्रेरणा

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सफलता के ठीक बाद इस नई ‘E20 जनता पार्टी’ का सामने आना मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। याद दिला दें कि नीट पेपर लीक विवाद के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद CJP ने पिछले हफ्ते ही अपना महीने भर लंबा विरोध प्रदर्शन सफलतापूर्वक वापस लिया था। एक पूरी तरह से अप्रत्याशित और गैर-पारंपरिक संगठन के लिए यह एक दुर्लभ और बड़ी जीत साबित हुई थी। अब ठीक उसी तर्ज पर E20 ईंधन के खिलाफ खड़े हुए इस नए डिजिटल जन-आंदोलन ने सरकार और नीति निर्माताओं की नींद उड़ा दी है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और अधिक गर्म होने के पूरे आसार हैं।