CJP News : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। सिलीगुड़ी की अधिवक्ता रिंकी चटर्जी ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और नेता सौरव दास के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय है और इस मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। हालांकि, शिकायत दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो गए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
वकील ने उठाया नाबालिगों की मौजूदगी का सवाल
रिंकी चटर्जी का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान लगभग 12 वर्ष की बच्चियों की मौजूदगी देखी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी कम उम्र के बच्चों को विरोध प्रदर्शन में कौन लेकर आया और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। उनके अनुसार, नाबालिग बच्चों को ऐसे आयोजनों में शामिल करना उनकी सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
जीरो एफआईआर दर्ज करने की मांग
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, अधिवक्ता ने सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगते हुए शिकायत सौंपी है। उन्होंने अपने आवेदन में कहा कि यदि किसी प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों को शामिल किया गया है, तो इस पूरे घटनाक्रम की जांच की जानी चाहिए। उनका कहना है कि कानून के अनुसार बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
सोशल मीडिया पोस्ट का भी किया उल्लेख
अपनी शिकायत में रिंकी चटर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक सोशल मीडिया वीडियो और उसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं द्वारा किए गए पोस्ट का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि प्रधानमंत्री को कथित तौर पर 12 वर्षीय बच्चियों पर पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगनी चाहिए। अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि यदि प्रदर्शन स्थल पर वास्तव में नाबालिग बच्चे मौजूद थे, तो उन्हें वहां लाने की जिम्मेदारी किसकी थी। इसी आधार पर उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग दोहराई।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी उठे थे सवाल
उल्लेखनीय है कि संसद मार्च के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद सामने आया था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पुलिस पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। प्रदर्शन से जुड़े कुछ वकीलों ने दावा किया था कि उनके पास कथित पुलिस कार्रवाई से संबंधित कई वीडियो मौजूद हैं, जिनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार दिखाई देता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच प्रक्रिया के बाद ही संभव होगी।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था मामला
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभिन्न मांगों के साथ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी भी कार्रवाई में संवैधानिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। फिलहाल सिलीगुड़ी में दर्ज शिकायत पर पुलिस आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच कर रही है। यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि शिकायत दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
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