Chandigarh Politics: चंडीगढ़ नगर निगम की 363वीं जनरल हाउस बैठक में 227 करोड़ रुपये के एक प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया है कि इस बड़े वित्तीय प्रस्ताव को बिना पर्याप्त चर्चा और नियमों का पालन किए टेबल एजेंडे के जरिए मंजूरी दी गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता के टैक्स से जुड़े इतने बड़े फैसले को जल्दबाजी में पारित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता के खिलाफ है।
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भाजपा और निगम प्रशासन को घेरा
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विजय पाल सिंह ने आरोप लगाया कि 31 जुलाई को हुई नगर निगम की बैठक में अंतिम समय पर 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव टेबल एजेंडे के रूप में पेश किया गया और बिना विस्तृत चर्चा के इसे पास कर दिया गया। उन्होंने कहा कि निगम की कार्यप्रणाली के अनुसार किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को पहले से पार्षदों तक पहुंचाना जरूरी होता है, ताकि वे विषय को समझ सकें और उस पर अपनी राय रख सकें। लेकिन इस मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
72 और 48 घंटे पहले एजेंडा देने के नियम का हवाला
विजय पाल सिंह ने पंजाब म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट और निगम नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्य एजेंडा बैठक से कम से कम 72 घंटे पहले और पूरक एजेंडा 48 घंटे पहले पार्षदों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि निगम प्रशासन ने इन नियमों की अनदेखी की और महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों को अंतिम समय में चर्चा के लिए लाया गया।
करोड़ों के सप्लीमेंट्री प्रस्तावों पर भी उठे सवाल
आप नेताओं का कहना है कि बैठक के दौरान मुख्य एजेंडे में बड़े वित्तीय प्रस्ताव शामिल नहीं थे, लेकिन बाद में करीब 300 करोड़ रुपये के सप्लीमेंट्री और टेबल एजेंडे पेश कर दिए गए। इनमें 227 करोड़ रुपये की परियोजना भी शामिल थी। पार्टी ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि से जुड़े फैसले को पार्षदों को पर्याप्त समय दिए बिना कैसे मंजूरी दी जा सकती है।
पार्षदों ने कहा- दस्तावेज पढ़ने का भी नहीं मिला मौका
आप पार्षद योगेश ढींगरा ने भी निगम बैठक की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान लगातार नए एजेंडे जोड़े जाते रहे और पार्षदों को सैकड़ों पन्नों के दस्तावेज आखिरी समय पर सौंपे गए। उनका कहना है कि टेबल एजेंडा नंबर-13 के तहत 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पारित किया गया, लेकिन पार्षदों को उसे पढ़ने और समझने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने संभाला मोर्चा
इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कई पार्षद और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने लोक भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया।
पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बढ़ा विवाद
227 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। आम आदमी पार्टी जहां इसे नियमों की अनदेखी और जनता के पैसे से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, वहीं यह मुद्दा आने वाले दिनों में नगर निगम की राजनीति में और गर्मी ला सकता है।
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