Calcutta High Court Bakrid verdict: कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज, गाय की कुर्बानी पर दिया बड़ा बयान

बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि गाय की कुर्बानी इस्लाम धर्म या इस त्योहार का कोई अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

Calcutta High Court Bakrid verdict

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 21, 2026

Calcutta High Court Bakrid verdict: आगामी बकरीद (ईद-उल-अजहा) के त्योहार से ठीक पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पशु बलि और धार्मिक परंपराओं को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने बकरीद के अवसर पर होने वाली पशु बलि को विनियमित करने और सख्त नियम तय करने वाले पश्चिम बंगाल सरकार के नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि गाय की कुर्बानी देना इस्लाम धर्म या बकरीद के त्योहार का कोई अनिवार्य (Essential) हिस्सा नहीं है। कोर्ट ने जनहित को सर्वोपरि मानते हुए राज्य सरकार के नियमों को सही ठहराया है।

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जनहित में सरकार लगा सकती है नियम

कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कानून और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच एक स्पष्ट लकीर खींची। अदालत ने अपने आदेश में साफ किया कि किसी भी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता असीमित नहीं है और राज्य सरकार जनहित, स्वास्थ्य तथा कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पशु बलि जैसी प्रथाओं को सीमित या विनियमित (Regulate) कर सकती है। इसके साथ ही, अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह गाय के अतिरिक्त अन्य स्वीकृत पशुओं की कुर्बानी के लिए नियमों के तहत छूट देने पर विचार कर सकती है, लेकिन इसके लिए तय शर्तों का पालन अनिवार्य होगा।

खुले और सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध

अदालत ने त्योहार के दौरान स्वच्छता और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक और बड़ा निर्देश जारी किया है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, अब राज्य में कहीं भी खुले में, सड़कों पर या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पशुओं की कुर्बानी या वध करने पर पूरी तरह से रोक रहेगी।

कुर्बानी की पूरी प्रक्रिया को केवल प्रशासन द्वारा पूर्व-निर्धारित, नामित (Designated) और सुरक्षित स्थानों पर ही करने की अनुमति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत किसी भी पशु का वध करने से पहले उसकी सख्त मेडिकल जांच अनिवार्य होगी और पशु चिकित्सा अधिकारियों से बाकायदा ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ प्राप्त करना होगा।

मंदिरों में पशु बलि पर पूर्ण बैन की मांग भी कोर्ट ने की खारिज

दिलचस्प बात यह है कि इस सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने मंदिरों में होने वाली सामूहिक पशु बलि (जैसे महाकाली पूजा या अन्य शक्तिपीठों पर होने वाली बलि) पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने वाली याचिकाएं आई थीं। हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।

अदालत ने संतुलन बनाते हुए कहा कि सदियों पुरानी धार्मिक प्रथाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक आदेशों के जरिए पूरे देश को रातों-रात शाकाहारी बनाने के नजरिए से इन मामलों को नहीं देखा जा सकता। श्रद्धा और जनहित दोनों में संतुलन जरूरी है।

क्या है पूरा विवाद और बंगाल सरकार का नोटिफिकेशन?

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक नोटिफिकेशन है। सरकार ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ के तहत त्योहारों के दौरान होने वाले पशु वध को लेकर कई कड़े नियम और शर्तें लागू कर दी थीं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह नोटिफिकेशन उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और 1950 के कानून के तहत मिलने वाली पारंपरिक छूट का उल्लंघन करता है।

दूसरी तरफ, राज्य और केंद्र सरकार के वकीलों ने कोर्ट में इन याचिकाओं का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश 1950 के मूल अधिनियम के दायरे में ही हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं।

सरकारी नोटिफिकेशन के मुख्य बिंदु और दंडात्मक कार्रवाई

पश्चिम बंगाल सरकार के जिस नोटिफिकेशन को कोर्ट ने सही माना है, उसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं:

बिना सर्टिफिकेट नो कुर्बानी: केवल उन्हीं पशुओं की बलि दी जा सकेगी, जिन्हें सरकारी डॉक्टरों द्वारा पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ दिया गया हो। बीमार या प्रतिबंधित पशुओं के वध पर पूर्ण रोक रहेगी।

स्थानों का निर्धारण: रिहायशी इलाकों, खुले मैदानों या सड़कों पर सरेआम पशु वध नहीं किया जा सकेगा।

कड़ी कार्रवाई: यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों, स्वच्छता मानकों या स्थान संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त दंडात्मक (Legal & Punitive) कार्रवाई की जाएगी।

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