Budget Session 2026 Suspension: संसद के वर्तमान सत्र में गतिरोध अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया है। मंगलवार को लोकसभा में उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण के दौरान हुए हंगामे ने हिंसक मोड़ ले लिया। सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने और पीठासीन अधिकारी की ओर कागज उछालने के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बावजूद सदन के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।
सदन में हंगामे की शुरुआत और राहुल गांधी का भाषण
कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलना शुरू किया। जैसे ही उन्होंने अपनी बात रखनी चाही, सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। सदन में शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि वक्ताओं की आवाज सुनाई देना बंद हो गई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष ने उनके दावों पर कड़ी आपत्ति जताई। देखते ही देखते सदन का वातावरण पूरी तरह अशांत हो गया।
वेल में पहुंचे सांसद और कागज उछालने की घटना
हंगामे के बीच कई विपक्षी सांसद सदन के बीचों-बीच यानी ‘वेल’ (Well) तक पहुँच गए। सांसदों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी दौरान कुछ सांसदों ने मर्यादा की सीमा लांघते हुए पीठासीन अधिकारी की कुर्सी की तरफ सरकारी कागजों के टुकड़े फाड़कर उछाले। विपक्षी सांसदों के इस आचरण को सदन की नियमावली का गंभीर उल्लंघन माना गया। मार्शलों के हस्तक्षेप के बावजूद सांसद पीछे हटने को तैयार नहीं थे, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
स्पीकर की सख्त कार्रवाई: 8 सांसद हुए निलंबित
सांसदों के इस अनियंत्रित व्यवहार को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाया। सदन की गरिमा बहाल करने के लिए तत्काल प्रभाव से आठ सांसदों को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया। निलंबित किए गए सांसदों में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग
प्रशांत परोले
एस वेंटकटरमण
मणिकम टैगोर
किरण कुमार रेड्डी
हिबी ईडन
गुरजीत औजला
(आठवें सांसद का नाम आधिकारिक सूची में शामिल)
इन सांसदों पर आरोप है कि उन्होंने न केवल सदन की कार्यवाही में बाधा डाली, बल्कि पीठासीन अधिकारी के प्रति अभद्र व्यवहार भी किया।
निलंबन के बाद फिर भड़का आक्रोश
हैरानी की बात यह रही कि निलंबन की घोषणा के तुरंत बाद भी सांसदों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। निलंबन की सजा सुनाए जाने के विरोध में कुछ सांसदों ने दोबारा कागज के टुकड़े हवा में उछाले और सदन से बाहर जाने से इनकार कर दिया। विपक्षी दलों का कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा है और सरकार चर्चा से भागने के लिए विपक्ष को सदन से बाहर कर रही है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि बिना अनुशासन के लोकतंत्र का मंदिर नहीं चल सकता।
संसदीय इतिहास और अनुशासन का सवाल
संसद में इस तरह की घटनाओं ने एक बार फिर संसदीय अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सदन में विरोध प्रकट करने के लोकतांत्रिक तरीके मौजूद हैं, लेकिन फिजिकल हिंसा या कागज उछालना संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है। दूसरी ओर, विपक्ष का तर्क है कि जब सदन में माइक बंद कर दिए जाएं और नेता प्रतिपक्ष को बोलने न दिया जाए, तो उनके पास विरोध दर्ज कराने के सीमित विकल्प रह जाते हैं। इस टकराव के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा अधर में लटक गई है।
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