BRICS Summit 2026: परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ी चिंता, नई दिल्ली घोषणा में बड़ा संदेश

BRICS Summit 2026 में परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। नई दिल्ली घोषणा में परमाणु सुरक्षा और नागरिक बुनियादी ढांचे की रक्षा पर जोर दिया गया। आखिर परमाणु ठिकानों पर हमलों का खतरा कितना गंभीर है और BRICS का यह संदेश वैश्विक राजनीति में क्या बड़ा बदलाव ला सकता है?

BRICS Summit 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 13, 2026

BRICS Summit 2026 : भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के नेताओं ने परमाणु सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। सम्मेलन के पहले दिन जारी नई दिल्ली घोषणापत्र में असैन्य बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी तथा सुरक्षा मानकों के तहत संचालित शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर किए गए हमलों की निंदा की गई। नेताओं ने स्पष्ट किया कि युद्ध या किसी भी तरह के सशस्त्र संघर्ष के दौरान परमाणु सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े मानकों से समझौता नहीं होना चाहिए।

बढ़ते परमाणु खतरे को लेकर दुनिया को चेतावनी

नई दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स नेताओं ने दुनिया में बढ़ते परमाणु जोखिम और विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के कारण पैदा हो रहे खतरे पर भी चिंता जताई। नेताओं ने कहा कि परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा केवल संबंधित देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। किसी परमाणु प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचने की स्थिति में मानव जीवन, पर्यावरण और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

पीएम मोदी की अध्यक्षता में घोषणापत्र पर बनी सहमति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। पहले दिन हुई उच्चस्तरीय बैठकों और चर्चाओं के बाद सभी सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के समापन पर घोषणापत्र को औपचारिक रूप से अपनाए जाने की घोषणा की।

अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन पर जताई नाराजगी

घोषणापत्र में किसी विशेष देश का नाम लिए बिना उन हमलों पर गंभीर चिंता जताई गई, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और IAEA के संबंधित प्रस्तावों के विपरीत माना गया है। नेताओं ने नागरिक बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने को गंभीर विषय बताया। साथ ही, इस बात पर जोर दिया गया कि परमाणु सुरक्षा के उपायों को हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों और पर्यावरण को संभावित बड़े नुकसान से सुरक्षित रखा जा सके।

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव भी एक अहम मुद्दा रहा। क्षेत्रीय परिस्थितियों को लेकर संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच कई विषयों पर मतभेद मौजूद हैं। इसके बावजूद भारत की अध्यक्षता में सदस्य देशों के बीच एक साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और तनावनई दिल्ली घोषणापत्र की एक खास बात यह रही कि इसमें अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए सैन्य हमलों या ईरान की ओर से खाड़ी के अन्य अरब देशों पर किए गए हमलों का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया।

माना जा रहा है कि घोषणापत्र की भाषा को संतुलित रखने का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मतभेदों को बढ़ने से रोकना और साझा सहमति बनाए रखना था। भारत की अध्यक्षता में यह रुख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता लगातार बढ़ रही है।

संतुलित भाषा से कायम रखा गया कूटनीतिक संतुलन

नई दिल्ली घोषणापत्र की एक खास बात यह रही कि इसमें अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए सैन्य हमलों या ईरान की ओर से खाड़ी के अन्य अरब देशों पर किए गए हमलों का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया। माना जा रहा है कि घोषणापत्र की भाषा को संतुलित रखने का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मतभेदों को बढ़ने से रोकना और साझा सहमति बनाए रखना था। भारत की अध्यक्षता में यह रुख शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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