Bihar Assembly Election: प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली राजनीतिक पार्टी जनसुराज ने हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एक रिट याचिका दाखिल की है। यह याचिका गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई।
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मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर सवाल
जनसुराज की याचिका का मुख्य केंद्र बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना है। पार्टी का आरोप है कि जब राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू थी, उसी दौरान सरकार ने इस योजना के तहत 25 से 35 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की। इसके साथ ही, चुनावी अवधि में नए लाभार्थियों को भी योजना से जोड़ा गया, जिसे जनसुराज ने पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है। पार्टी का कहना है कि इस तरह की वित्तीय मदद का उद्देश्य सीधे तौर पर मतदाताओं को प्रभावित करना था, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता के खिलाफ है।
चुनाव की समयरेखा और कथित उल्लंघन
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 6 और 11 नवंबर 2025 को मतदान हुआ था, जबकि 14 नवंबर 2025 को नतीजों की घोषणा की गई। जनसुराज का दावा है कि इन तारीखों से पहले और चुनावी प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार ने महिला रोजगार योजना के तहत बड़े पैमाने पर धनराशि ट्रांसफर कर चुनावी माहौल को प्रभावित किया।याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह योजना 26 सितंबर 2025 को शुरू की गई थी, जो चुनाव से ठीक पहले का समय था, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और संवैधानिक आधार

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ द्वारा की जानी है। जनसुराज ने अपनी याचिका में दावा किया है कि सरकार की यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन है। साथ ही, चुनाव आयोग को अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग भी की गई है।
जीविका समूह और चुनावी ड्यूटी का मुद्दा
याचिका में एक और गंभीर आरोप यह है कि जीविका (JEEVIKA) स्वयं सहायता समूह की लगभग 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को दोनों चरणों के चुनाव में पोलिंग बूथ पर नियुक्त किया गया। जनसुराज के अनुसार, यह भी चुनावी निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
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दोबारा चुनाव और नए दिशा-निर्देशों की मांग
जनसुराज ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह अपने पुराने आदेशों का हवाला लेते हुए बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दे। इसके अलावा, पार्टी ने यह भी मांग की है कि चुनाव आयोग मुफ्त योजनाओं और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जुड़ी स्कीम्स के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए। पार्टी का सुझाव है कि सत्ताधारी दल को ऐसी योजनाओं की घोषणा चुनाव से कम से कम छह महीने पहले ही करनी चाहिए, ताकि उनका इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए न किया जा सके।










