Bharat Tiwari Encounter: CM सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला, एनकाउंटर की जांच के आदेश

भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से कराई जाएगी।

Bharat Tiwari encounter

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 20, 2026

Bharat Tiwari encounter: बिहार के भोजपुर में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस घटना को लेकर बढ़ते जनाक्रोश और परिजनों के गंभीर आरोपों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए एलान किया कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराई जाएगी। सीएम के इस फैसले का उद्देश्य घटना के पीछे की असली सच्चाई को सामने लाना है, क्योंकि एक तरफ पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी तरफ परिजन और स्थानीय लोग इसे सीधे तौर पर ‘फर्जी एनकाउंटर’ और हत्या करार दे रहे हैं।

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सुबह दर्ज हुई एफआईआर, परिजनों को ही बनाया आरोपी

इस मामले में हैरान करने वाली बात यह रही कि शनिवार (20 जून) की सुबह भोजपुर पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीन अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज कीं। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इन मुकदमों में मृतक भरत तिवारी के बुजुर्ग पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को ही मुख्य आरोपी बना दिया गया है। शाहपुर के तत्कालीन थाना अध्यक्ष के आवेदन पर दर्ज इस प्राथमिकी में हथियार लहराने, अपराधियों को संरक्षण देने, सरकारी काम में बाधा डालने, मुख्य सड़क जाम करने और पुलिस बल पर जानलेवा रोड़ेबाजी करने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, पुलिस ने विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम करने के आरोप में बिलौटी पंचायत के मुखिया सहित 14 नामजद और कई अज्ञात ग्रामीणों पर भी मुकदमा दर्ज किया है, जिससे पूरे इलाके में भारी तनाव है।

पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का बड़ा हमला

इस एनकाउंटर पर बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने पुलिस प्रशासन और सरकार को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा बयान दिया है। उन्होंने पुलिसिया थ्योरी को खारिज करते हुए कहा, “क्या भरत भूषण कोई दुर्दांत आतंकवादी, लुटेरा या बदमाश था? मुझे तो लगता है कि वह एक मस्ताना और दीवाना युवक था, जो जनता की समस्याओं के लिए आवाज उठा रहा था। व्यवस्था या पुलिस को गाली देना इतना बड़ा अपराध तो नहीं कि किसी की जान ले ली जाए।”

पूर्व डीजीपी ने आगे कहा कि जब वीडियो में साफ दिख रहा है कि उसने अपने हथियार फेंक दिए थे और सरेंडर कर चुका था, तो फिर उसे गोली क्यों मारी गई? पुलिस और उसके बीच की दूरी इतनी थी कि गोली मारने की नौबत नहीं थी। अगर पुलिस उसे विक्षिप्त (पागल) बता रही है, तो वह उसका इलाज क्यों नहीं करा रही थी? यह सीधे तौर पर हत्या का मामला है और इसके जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें तत्काल सेवा से बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

16 जून से 20 जून तक क्या-क्या हुआ

भरत तिवारी ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह गांव की समस्याओं (बाढ़ राहत आदि) को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अवैध पिस्तौल से हवाई फायरिंग करता दिखा। शाहपुर पुलिस और एसटीएफ की टीम सुबह भरत के घर पहुंची। भरत ने फेसबुक लाइव चलाकर सरेंडर करने की बात कही और पिस्तौल दूर फेंक दी। लेकिन पुलिस का दावा है कि उसने टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने उसके दोनों पैरों में गोली मारी।

घायल भरत को पहले आरा अस्पताल और फिर पटना के पीएमसीएच (PMCH) रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि गोली मारने के अलावा उसे अस्पताल में जहर भी दिया गया। शव गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने आरा-बक्सर हाईवे जाम कर उग्र प्रदर्शन किया। पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज किया। दबाव बढ़ता देख भोजपुर एसपी ने शाहपुर थानाध्यक्ष समेत कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए।

पुलिस ने प्रदर्शन के आरोप में मृतक के परिवार पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया, जिसके तुरंत बाद मामले को शांत करने के लिए सीएम सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच कराने की बड़ी घोषणा की।

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