Bakrid 2026: गुरुवार, 28 मई को पूरे देश में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही हजारों लोग मस्जिदों और ईदगाहों में इकट्ठा हुए और विशेष नमाज अदा की। लोग पारंपरिक कपड़े पहनकर नमाज में शामिल हुए और अपने परिवार, दोस्तों व पड़ोसियों को बधाई दी।
Bakrid 2026: आज मनाई जा रही है बकरीद; मस्जिदों में अदा की गई नमाज, जानिए क्यों दी जाती है कुर्बानी?
भाईचारे और सद्भाव का संदेश
इस अवसर पर लोगों ने कहा कि बकरीद का त्योहार भाईचारे, सांप्रदायिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीक है। यह करुणा, बलिदान और दान की भावना को भी याद दिलाता है। पर्व का असली संदेश इंसानियत और त्याग से जुड़ा है, जो समाज में एकता और सहयोग को मजबूत करता है।
सुरक्षा व्यवस्था
त्योहार शांतिपूर्वक मनाया जाए और कानून-व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक जामा मस्जिद के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। मस्जिद परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों की पूरी जांच की गई ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
धार्मिक महत्व
ईद-उल-अजहा दुनियाभर के मुसलमानों के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व रखता है। यह पर्व पैगंबर इब्राहिम की उस भक्ति और बलिदान की याद दिलाता है जब उन्होंने ईश्वर के आदेश का पालन करते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। अल्लाह ने उनकी नीयत को स्वीकार किया और उनके बेटे की जगह एक दुंबे को कुर्बानी के लिए भेजा। यही घटना इस पर्व का आधार है। यह अवसर अटूट आस्था, ईश्वर के प्रति आज्ञाकारिता, कृतज्ञता, करुणा, क्षमा, बलिदान और दान का प्रतीक है।
विभिन्न राज्यों में पर्व का आयोजन
भारत के अधिकांश हिस्सों में बकरीद 28 मई को मनाई गई, लेकिन जम्मू-कश्मीर सहित कुछ क्षेत्रों में यह एक दिन पहले यानी बुधवार को ही मनाई गई।
चांद देखने पर निर्भरता
ईद-उल-अजहा की तारीख चांद देखने पर निर्भर करती है। इस वर्ष भारत के कई हिस्सों में धार्मिक अधिकारियों ने बताया कि धुल-हिज्जा का चांद तय समय पर नहीं दिखा। इसी कारण इस्लामी महीने की शुरुआत एक दिन आगे बढ़ गई और देश के अधिकांश राज्यों में बकरीद 28 मई को मनाई गई।
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