Ayushman Bharat in Bengal : पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक की। इस उच्च स्तरीय कूटनीतिक चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता के लिए एक बेहद लोक-कल्याणकारी और ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि आगामी जुलाई महीने से पूरे पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत कार्ड’ वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही पश्चिम बंगाल अब आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार के इस फ्लैगशिप और दुनिया के सबसे बड़े हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम (स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम) में वापस शामिल हो जाएगा।
स्वास्थ्य साथी के 6 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा आयुष्मान भारत का सीधा लाभ
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा संचालित की जा रही ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना के दायरे में आने वाले लगभग छह करोड़ लाभार्थियों को अब पूरी तरह से आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कनवर्ट कर ट्रांसफर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस योजना के दूरगामी फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि इस निर्णय से न केवल पश्चिम बंगाल के भीतर रह रहे स्थानीय निवासियों को उत्कृष्ट चिकित्सा लाभ मिलेगा, बल्कि रोजी-रोटी के सिलसिले में देश के अन्य राज्यों और सुदूर कोनों में काम कर रहे बंगाल के प्रवासी मजदूरों व नागरिकों को भी देशव्यापी स्तर पर मुफ्त इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
साल 2019 में तत्कालीन टीएमसी सरकार ने खुद को योजना से कर लिया था अलग
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य की बात करें तो आयुष्मान भारत योजना को मूल रूप से पश्चिम बंगाल में 23 सितंबर, 2018 को देश के अन्य हिस्सों के साथ ही लॉन्च किया गया था। परंतु, तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार और केंद्र के बीच क्रेडिट शेयरिंग (श्रेय लेने की होड़) और योजना की ब्रांडिंग को लेकर गहरा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। इसके परिणामस्वरूप, तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार 10 जनवरी, 2019 को इस केंद्रीय प्रोग्राम से पूरी तरह बाहर हो गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने केवल बंगाल तक सीमित अपने खुद के ‘स्वास्थ्य साथी’ हेल्थ कवरेज मॉडल पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया था, जिससे बंगाल के लोगों को राज्य के बाहर इस बीमा का लाभ मिलना बंद हो गया था।
केंद्रीय कोटे से बंगाल को मिले 976 करोड़, रुका हुआ फंड भी होगा बहाल
राज्य की चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं को एक नया और मजबूत बूस्टर डोज देने के लिए केंद्र सरकार ने खजाना खोल दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के संचालन के लिए पश्चिम बंगाल के सेंट्रल शेयर (केंद्रीय हिस्सेदारी) के रूप में ₹976 करोड़ के भारी-भरकम बजट को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके अतिरिक्त, पिछले दो वर्षों के दौरान जो केंद्रीय फंड आवंटित किए गए थे, लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट न दिए जाने या असहयोग के कारण मंजूर नहीं हो सके थे, केंद्र सरकार अब उन तमाम रुके हुए वित्तीय पैकेजों को भी राज्य को वापस हस्तांतरित करने जा रही है।
30 मई से कोलकाता के बिधाननगर अस्पताल से शुरू होगा बड़ा टीकाकरण अभियान
इस वर्चुअल बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता के लिए एक व्यापक हेल्थ पैकेज की रूपरेखा भी साझा की। इसके तहत केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल को सात लाख से अधिक जीवनरक्षक वैक्सीन डोज की तत्काल सप्लाई करने जा रही है। इस बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ आगामी 30 मई को कोलकाता के प्रतिष्ठित बिधाननगर सरकारी अस्पताल से किया जाएगा। इसके साथ ही, उसी दिन यानी 30 मई से पूरे राज्य में महिलाओं को गंभीर बीमारी से बचाने के लिए ‘सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण अभियान’ (HPV वैक्सीन) की भी युद्धस्तर पर शुरुआत की जाएगी, ताकि राज्य में मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दिया हर संभव वित्तीय और ढांचागत मदद का भरोसा
आयोजित इस द्विपक्षीय समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) और अन्य प्रमुख केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चिकित्सा बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए हर संभव वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। केंद्र सरकार ने बताया कि एनएचएम के तहत बंगाल के लिए कुल ₹3505.59 करोड़ स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिसमें से ₹527.58 करोड़ की पहली किस्त तुरंत जारी भी कर दी गई है।
सूबे में 469 नए जनऔषधि केंद्र और 4 जिलों में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज
राज्य सरकार ने आम लोगों को बेहद सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पूरे बंगाल में 469 नए प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोलने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही, राज्य के दूरदराज के जिलों अलीपुरद्वार, कालिम्पोंग, दक्षिण दिनाजपुर और पश्चिम बर्धमान में नए और आधुनिक सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा, भौगोलिक रूप से पिछड़े उत्तर बंगाल के नागरिकों को सुपर-स्पेशियलिटी इलाज मुहैया कराने के लिए वहां एक नया अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) खोलने का प्रस्ताव भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपा गया है।
डॉक्टरों की भारी कमी और शिशु मृत्यु दर पर केंद्र ने जताई गंभीर चिंता
बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था के कुछ बेहद चिंताजनक पहलू भी सामने आए, जिस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गहरी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में डॉक्टरों और नर्सों के स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 53 प्रतिशत स्टाफ ही कार्यरत है, जिसे जल्द भरने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, बंगाल में पांच साल से कम उम्र के मासूम बच्चों की मृत्यु दर देश के कई अन्य विकासशील राज्यों की तुलना में काफी अधिक पाई गई है। इस रिपोर्ट में विशेष रूप से कोलकाता, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्धमान, बीरभूम और मालदा जिलों की शिशु स्वास्थ्य स्थिति को बेहद नाजुक और चिंताजनक बताते हुए वहां तत्काल सुधार करने को कहा गया है।
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