Ram Mandir Scam: आरोपी टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच फोन कॉल का दावा, बीजेपी हमलावर

अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित गबन और वित्तीय अनियमितता के मामले में देश की राजनीति गरमा गई है। बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक ने आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी टिन्नू यादव की सपा प्रमुख अखिलेश यादव से कई बार फोन पर बातचीत हुई थी। वहीं, वीएचपी ने प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसी को पत्र लिखकर सबूतों की मांग की है।

Ram Mandir Scam

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 5, 2026

Ram Mandir Scam: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित गबन और चोरी के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सहित देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव पर बेहद संगीन आरोप मढ़े हैं। दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई बड़े विपक्षी रणनीतिकारों के विरुद्ध जांच की मांग बुलंद कर दी है। वीएचपी ने इस संबंध में जांच अधिकारी को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई है।

अखिलेश यादव और टिन्नू यादव के बीच कथित बातचीत का दावा

बताते चले कि, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर धन गबन प्रकरण के मुख्य आरोपियों में शामिल रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से कई मर्तबा फोन पर सीधी बातचीत हुई थी। अजय आलोक ने तंज कसते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का असली चेहरा अब जनता के सामने बेनकाब हो रहा है। जैसे-जैसे इस पूरे घोटाले की परतें उघड़ेंगी, वैसे-वैसे देश के समक्ष यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस बड़ी चोरी के पीछे कौन से सफेदपोश चेहरे छिपे हुए हैं। उन्होंने आगाह किया कि इस मामले में अभी कई और चौंकाने वाले खुलासे होने बाकी हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर बरसी बीजेपी

बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक ने कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले वरिष्ठ राजनेता दिग्विजय सिंह को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दिग्विजय सिंह को भगवान श्रीराम का धुर विरोधी और नास्तिक करार दिया। दरअसल, दिग्विजय सिंह ने एक ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ में हिस्सा लेते हुए घोषणा की थी कि वह राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए चंदे में हुई कथित वित्तीय हेराफेरी को लेकर न्यायालय की शरण लेंगे। उन्होंने कहा था कि यदि अदालत को इस धन के उपयोग में कोई धांधली मिलती है, तो वह अपनी दान राशि वापस मांगेंगे और उसे किसी अन्य मान्यता प्राप्त शंकराचार्य ट्रस्ट को सौंप देंगे। इस पर पलटवार करते हुए बीजेपी ने कहा कि दिग्विजय सिंह पहले अपनी रसीद दिखाएं, मंदिर ट्रस्ट उन्हें ब्याज सहित पैसा लौटा देगा क्योंकि ऐसे नास्तिकों का धन भगवान के चरणों में नहीं जाना चाहिए।

विपक्षी नेताओं के बयानों की न्यायिक जांच की मांग

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को एक पत्र भेजकर मामले में नया मोड़ ला दिया है। वीएचपी ने मांग की है कि प्रियंका गांधी वाड्रा, रामगोपाल यादव, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के सार्वजनिक बयानों की गहनता से जांच की जाए। पत्र में उल्लेख किया गया है कि इन नेताओं ने राम मंदिर के चंदे में लगभग 20,000 करोड़ रुपये तक के भारी गबन और जमीन खरीद में धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। ऐसे में जांच एजेंसी को इन सभी को पूछताछ के लिए समन जारी करना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि इनके दावों का आधार और पुख्ता सबूत क्या हैं।

‘एक्स’ पर पोस्ट कर जांच में सहयोग की उठाई मांग

विश्व हिंदू परिषद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी इस पत्र को साझा करते हुए अपनी मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है। वीएचपी का कहना है कि यदि आरोप लगाने वाले विपक्षी दिग्गजों के पास इस कथित घोटाले से जुड़े कोई भी प्रामाणिक दस्तावेज या साक्ष्य हैं, तो उन्हें तुरंत जांच एजेंसी के सुपुर्द करना चाहिए। परिषद के अनुसार, यदि ये नेता कोई विश्वसनीय सबूत पेश करते हैं, तो इससे जांच अधिकारियों को सच्चाई तक पहुंचने में बड़ी मदद मिलेगी, अन्यथा केवल राजनीतिक लाभ के लिए देश की आस्था के केंद्र पर झूठे लांछन लगाने वालों की वास्तविकता भी देश के सामने आनी चाहिए।