Asmita Dey wins gold in commonwealth Games: अस्मिता डे ने किया कमाल, जूडो में भारत को दिलाया पहला कॉमनवेल्थ गोल्ड

अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की 48 किग्रा जूडो स्पर्धा में 'गोल्डन स्कोर' के रोमांचक मुकाबले में जीत दर्ज कर भारत को जूडो का पहला ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया है।

Asmita Dey wins gold in commonwealth Games

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 31, 2026

Asmita Dey wins gold in commonwealth Games: भारतीय खेल जगत के लिए राष्ट्रमंडल खेल 2026 के मंच से एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। देश की प्रतिभाशाली और जुझारू जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में वह कर दिखाया है जो आज से पहले किसी भी भारतीय जूडोका ने नहीं किया था। अस्मिता ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को स्वर्ण पदक दिलाया है और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली जूडो खिलाड़ी (जूडोका) बन गई हैं। इस रोमांचक जीत के साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय जूडो का मान पूरी दुनिया में बढ़ा दिया है।

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‘गोल्डन स्कोर’ तक खिंचा बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबला

अस्मिता डे का यह खिताबी मुकाबला किसी थ्रिलर फिल्म के क्लाइमैक्स से कम नहीं था। मैच की शुरुआत से ही दोनों ही खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली और एक-एक अंक के लिए जबरदस्त संघर्ष हुआ। निर्धारित खेल समय (रेगुलेशन टाइम) की समाप्ति तक दोनों जूडोका 1-1 की बराबरी पर टिकी रहीं। जब मैच में रोमांच और दबाव अपने चरम पर पहुंच गया, तब स्वर्ण पदक के विजेता का फैसला ‘गोल्डन स्कोर’ यानी अतिरिक्त समय के जरिए होने का नियम लागू हुआ।

अतिरिक्त समय के इस बेहद तनावपूर्ण पल में अस्मिता ने अपनी गजब की मानसिक मजबूती और असाधारण धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने विरोधी खिलाड़ी के हर आक्रामक दांव को बड़ी चतुराई से विफल किया और सही मौके का इंतजार किया। आखिरकार, मुकाबले के निर्णायक मोड़ पर अस्मिता ने एक सटीक और दमदार दांव लगाते हुए ‘यूको’ (Yuko) के जरिए निर्णायक अंक हासिल कर लिया और मुकाबला 2-1 से अपने नाम कर लिया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही स्टेडियम और भारतीय खेल खेमे में जश्न की लहर दौड़ गई।

भारतीय जूडो के इतिहास में मील का पत्थर है यह सफलता

अस्मिता डे की यह स्वर्णिम सफलता भारतीय जूडो के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय और मील का पत्थर साबित होगी। जूडो जैसे कठिन और शारीरिक रूप से बेहद demanding कॉम्बैट स्पोर्ट्स में अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा अटूट जुझारूपन दिखाना आसान नहीं होता। कड़े मुकाबले के दौरान जब स्कोर बराबरी पर था, तब अस्मिता का आत्मविश्वास और उनकी अनुशासित रणनीति ही उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के करोड़ों युवाओं और विशेषकर खेल जगत में करियर बनाने वाले उभरते हुए एथलीटों के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत बनेगी।

जूडो स्पर्धा में अभी और स्वर्ण पदकों की उम्मीदें बाकी

अस्मिता डे की इस धमाकेदार और ऐतिहासिक जीत के साथ ही देश में जश्न का माहौल शुरू हो चुका है, लेकिन खेल प्रेमियों के लिए आज की रात का रोमांच अभी समाप्त नहीं हुआ है। भारतीय जूडो टीम के लिहाज से यह पूरा दिन और भी अधिक ऐतिहासिक बन सकता है, क्योंकि भारत के दो अन्य बेहतरीन जूडो खिलाड़ी भी अपने-अपने भारवर्ग के फाइनल मुकाबलों में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

भारत के हर्ष सिंह और यामिनी मौर्या भी शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने फाइनल मुकाबलों में जगह बना चुके हैं। यदि ये दोनों खिलाड़ी भी अस्मिता डे के पदचिह्नों पर चलते हुए खिताबी मुकाबले में जीत दर्ज करने में सफल रहते हैं, तो भारतीय खेल इतिहास में जूडो के खेल के लिए यह अब तक की सबसे यादगार और सुनहरी रात बन जाएगी। फिलहाल, पूरे देश की निगाहें हर्ष और यामिनी के आने वाले मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।

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