Ashok Chakra to Group Captain Shubhanshu Shukla: अशोक चक्र से सम्मानित हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को गणतंत्र दिवस 2026 पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अशोक चक्र से सम्मानित किया। वे जून 2025 में नासा के एक्सिओम मिशन 4 के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय नागरिक बने थे।

Ashok Chakra to Group Captain Shubhanshu Shukla

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जनवरी 26, 2026

Ashok Chakra to Group Captain Shubhanshu Shukla: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंडियन एयर फोर्स के टेस्ट पायलट और ISRO के गगनयात्री, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को प्रतिष्ठित अशोक चक्र से सम्मानित किया। इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों और देशवासियों की उपस्थिति में यह समारोह आयोजित हुआ। जून 2025 में, शुभांशु शुक्ला नासा के प्राइवेट स्पेसफ्लाइट मिशन, एक्सिओम मिशन 4 के हिस्से के तौर पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का दौरा करने वाले पहले भारतीय नागरिक बने थे।

Republic Day 2026: श्रीनगर में तिरंगे के रंग में रंगा पर्यटक, लोगों ने की जमकर सराहना

अंतरिक्ष में बहादुरी और सैन्य कौशल का संगम

Ashok Chakra to Group Captain Shubhanshu Shukla
अशोक चक्र से सम्मानित हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने न केवल भारतीय वायुसेना में अपनी सैन्य वीरता साबित की, बल्कि अंतरिक्ष की ऊंचाइयों में भी साहस का परचम लहराया। उनका यह कारनामा दिखाता है कि बहादुरी केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष जैसी चुनौतीपूर्ण सीमाओं तक भी पहुंच सकती है। शुक्ला की यात्रा लखनऊ के एक युवा सपने देखने वाले से अंतरिक्ष यान के कंट्रोल तक, भारत के अंतरिक्ष मिशनों में प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

41 साल के अंतराल के बाद भारतीय अंतरिक्ष मिशन में उपलब्धि

राकेश शर्मा की उड़ान के 41 साल बाद शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में भारत की मौजूदगी को और मजबूत किया। इस मिशन ने लाखों युवाओं को प्रेरित किया और यह प्रमाणित किया कि साहस और समर्पण से इंसानी सीमाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है। उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें अशोक चक्र प्रदान किया गया, जो आमतौर पर युद्ध में बहादुरी दिखाने वाले सैनिकों को दिया जाता है।

लखनऊ से अंतरिक्ष तक का संघर्ष और सफलता

लखनऊ में जन्मे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 17 वर्ष की उम्र में नेशनल डिफेंस एकेडमी में प्रवेश लिया। 2006 में उन्होंने भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में सेवा शुरू की और Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar और Hawk जैसे विमानों पर 2,000 से अधिक घंटे की उड़ान पूरी की। बाद में, वह टेस्ट पायलट और कॉम्बैट लीडर बने। उन्होंने IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की और 2019 में ISRO द्वारा चयनित होकर गगनयान मिशन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया।

अशोक चक्र प्राप्ति का महत्व

Ashok Chakra to Group Captain Shubhanshu Shukla
अशोक चक्र से सम्मानित हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला

अशोक चक्र शुक्ला को उनके अंतरिक्ष मिशन एक्सिओम मिशन 4 में असाधारण बहादुरी और अनुकरणीय साहस के लिए प्रदान किया गया। इस मिशन के दौरान, उन्होंने स्पेसएक्स ड्रैगन ‘ग्रेस’ को सफलतापूर्वक पायलट किया और 18 दिन तक ISS पर पेगी व्हिटसन के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय क्रू के साथ रहे। मिशन की जटिलताओं और जोखिमों के बावजूद, उन्होंने माइक्रोग्रैविटी में ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक मैनेज किया।

अंतरिक्ष और सैन्य वीरता का प्रेरणादायक उदाहरण

शुभांशु शुक्ला के इस कार्य ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सैन्य और अंतरिक्ष क्षेत्र में उत्कृष्टता की कोई सीमा नहीं है। 1984 के बाद भारत के अंतरिक्ष इतिहास में यह उपलब्धि एक नया अध्याय जोड़ती है। उन्हें अशोक चक्र प्रदान कर, भारत ने अंतरिक्ष में बहादुरी और साहस के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य शक्ति का जोरदार प्रदर्शन, दुनिया हुई प्रभावित