Asaram News: AIIMS रिपोर्ट के बाद भी आसाराम को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया आदेश

जोधपुर दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत नहीं मिली। AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, स्वास्थ्य बिगड़ने पर दोबारा याचिका दायर करने की अनुमति दी गई। सुनवाई के दौरान पैरोल को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां हुईं।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 6, 2026

Asaram News: जोधपुर दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। खराब स्वास्थ्य के आधार पर दायर अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने तत्काल जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया और इसे लंबित रखते हुए कहा कि यदि भविष्य में स्वास्थ्य स्थिति अधिक गंभीर होती है तो दोबारा अंतरिम जमानत की मांग की जा सकती है।

आसाराम मेडिकल रिपोर्ट और AIIMS की राय पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एम्स (AIIMS) मेडिकल रिपोर्ट तलब की थी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति कितनी गंभीर है और क्या उन्हें चिकित्सा आधार पर अंतरिम राहत दी जा सकती है।एम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि फिलहाल आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी जरूरी है और उन्हें 24 घंटे चिकित्सकीय देखरेख में रखा जाना चाहिए। इसी रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए अदालत ने तत्काल जमानत देने से इनकार किया।

आसाराम को 24 घंटे केयरगिवर रखने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को राहत देते हुए यह अनुमति दी कि वे अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित (ट्रेंड) केयरगिवर 24 घंटे अपने साथ रख सकते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ती है, तो वे दोबारा सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।अदालत का कहना था कि फिलहाल उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम जमानत की आवश्यकता नहीं बनती, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों में बदलाव होने पर मामले पर फिर विचार किया जा सकता है।

राजस्थान सरकार का आरोप

सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट में 20 दिन की पैरोल मांगते समय सुप्रीम कोर्ट में लंबित अंतरिम जमानत याचिका की जानकारी साझा नहीं की।तुषार मेहता के अनुसार, यह अदालत के समक्ष सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रस्तुत करने के सिद्धांत के विपरीत है। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भी इस आचरण पर नाराजगी जताई और इसे उचित नहीं माना।

राजस्थान हाई कोर्ट ने दी 20 दिन की पैरोल

राजस्थान हाई कोर्ट ने हाल ही में आसाराम को 20 दिनों की पैरोल प्रदान की थी। अदालत ने यह राहत उनकी लंबी जेल अवधि और अंतरिम राहत के दौरान उनके व्यवहार को ध्यान में रखते हुए दी थी।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस पैरोल का भी उल्लेख हुआ और यह सवाल उठा कि क्या हाई कोर्ट के समक्ष सभी आवश्यक जानकारियां प्रस्तुत की गई थीं। इस मुद्दे पर अदालत ने गंभीर टिप्पणी करते हुए पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आसाराम दुष्कर्म केस में आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल आसाराम को अंतरिम जमानत नहीं मिलेगी। हालांकि, अदालत ने भविष्य में स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में दोबारा याचिका दाखिल करने का रास्ता खुला रखा है।अब इस मामले में आगे की कार्रवाई आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति, मेडिकल रिपोर्ट और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नए तथ्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल अदालत ने चिकित्सा निगरानी जारी रखने और जरूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प अपनाने की अनुमति देते हुए मामले को लंबित रखा है।