Asaram News: यौन उत्पीड़न के मामले में जोधपुर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू के भाग्य का फैसला राजस्थान हाई कोर्ट ने सुना दिया है। कोर्ट ने आसाराम की ओर से दायर सजा स्थगन याचिका (SOS) को पूरी तरह खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को यथावत (बरकरार) रखा है।
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले पर फैसला सुनाया। गौरतलब है कि इन दिनों आसाराम चिकित्सा आधार पर अस्थाई जमानत पर जेल से बाहर चल रहा था, लेकिन हाई कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब उसे तुरंत कानून के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) करना होगा। हालांकि, इस मामले में सह-आरोपी रहीं शिल्पी और शरतचंद को अदालत ने सजा से राहत दी है।
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अंधविश्वास और डराने-धमकाने का था पूरा मामला
यह पूरा विवाद साल 2013 का है, जिसने देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाली उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की एक नाबालिग छात्रा अचानक बेहोश हो गई थी। आश्रम की संचालिका और आसाराम की अनुयायी शिल्पी ने बच्ची के माता-पिता को डराया कि उस पर भूत-प्रेत का साया है, जिसका इलाज केवल ‘बापू’ ही कर सकते हैं। घबराए हुए माता-पिता 14 अगस्त 2013 को अपनी बेटी को लेकर जोधपुर के पास स्थित मणाई आश्रम पहुंचे। आसाराम के कहने पर माता-पिता बाहर अनुष्ठान और जाप करने बैठ गए और बच्ची को अकेले कुटिया के भीतर भेज दिया गया।
कुटिया के भीतर आसाराम ने नाबालिग छात्रा के साथ अश्लील हरकतें और यौन उत्पीड़न किया। जब बच्ची बुरी तरह डर गई, तो आसाराम ने उसे धमकी दी कि यदि उसने इस बारे में किसी को भी बताया, तो उसके माता-पिता की हत्या करवा दी जाएगी। घर लौटने के बाद पीड़ित बच्ची ने हिम्मत जुटाकर माता-पिता को सारी सच्चाई बताई।
दिल्ली में दर्ज हुई ‘जीरो FIR’
चूंकि पीड़ित परिवार शाहजहांपुर का था और डरा हुआ था, इसलिए वे दिल्ली पहुंचे। 19 अगस्त 2013 को दिल्ली के कमला नगर थाने में इस मामले की ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई। दिल्ली पुलिस ने तुरंत पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराया और मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए।
इसके बाद मामले की डायरी जोधपुर पुलिस को ट्रांसफर की गई। जोधपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 31 अगस्त और 1 सितंबर 2013 की मध्यरात्रि को इंदौर के आश्रम से आसाराम को गिरफ्तार कर लिया। तब से लेकर आज तक आसाराम लगातार सलाखों के पीछे ही है।
नामचीन वकीलों की फौज भी नहीं दिला पाई राहत
आसाराम ने खुद को जेल से बाहर निकालने और जमानत हासिल करने के लिए देश के सबसे महंगे और दिग्गज विधि विशेषज्ञों की एक बड़ी फौज खड़ी की थी। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक आसाराम की ओर से राम जेठमलानी, सुब्रमण्यम स्वामी, मुकुल रोहतगी, केटीएस तुलसी और सिद्धार्थ लूथरा जैसे नामचीन वकीलों ने पैरवी की और दलीलें पेश कीं।
इसके बावजूद, अपराध की गंभीरता और पुख्ता सबूतों के मद्देनजर देश की किसी भी अदालत ने आसाराम को नियमित या अंतरिम जमानत के रूप में कोई भी आंशिक राहत नहीं दी। राजस्थान हाई कोर्ट के इस ताजा फैसले ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि आसाराम को अपनी अंतिम सांस तक जेल की कोठरी में ही रहना होगा।










