Arvind Kejriwal: क्या जज को सुनवाई से हटना चाहिए? केजरीवाल की ‘रिक्यूजल’ मांग पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला आज

अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट आज अहम फैसला सुनाने जा रहा है, जिसमें यह तय होगा कि संबंधित जज को मामले से हटना चाहिए या नहीं, अब सवाल यह है कि क्या इस निर्णय से केस की दिशा बदलेगी और केजरीवाल को कोई कानूनी राहत मिलेगी या नहीं

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 16, 2026

Arvind Kejriwal: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट में पेश होंगे। वे अदालत की कार्यवाही में दोपहर 2:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। यह सुनवाई उनके मामले से जुड़े कई अहम कानूनी पहलुओं को लेकर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी पेशी

जानकारी के अनुसार, अरविंद केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं होंगे, बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में हिस्सा लेंगे। कोर्ट में उनके पक्ष की ओर से कानूनी टीम अपना तर्क प्रस्तुत करेगी। यह मामला पहले से चल रही कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें अदालत ने कई दस्तावेजों और हलफनामों पर विचार करना है।

नए हलफनामे पर अदालत का रुख

इस केस में एक अहम मोड़ तब आया जब अदालत ने हाल ही में दाखिल किए गए नए हलफनामे को रिकॉर्ड में लेने से इनकार कर दिया। इस निर्णय के बाद केजरीवाल की कानूनी टीम आज अदालत के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हलफनामे को रिकॉर्ड में न लिए जाने का मुद्दा मामले की दिशा पर असर डाल सकता है, इसलिए इस पर बहस महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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रिक्यूजल याचिका पर भी होगी सुनवाई

रिक्यूजल याचिका पर भी होगी सुनवाई
रिक्यूजल याचिका पर भी होगी सुनवाई

आज की सुनवाई में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से जुड़े रिक्यूजल (recusal) की याचिका है। इस याचिका में मांग की गई है कि जज को इस मामले से अलग किया जाए।इस याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है, यह भी केस की आगे की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। केजरीवाल की ओर से इस मुद्दे पर भी विस्तृत दलील पेश की जाएगी।

कानूनी प्रक्रिया पर बढ़ी नजरें

इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर निगरानी बढ़ गई है। दिल्ली हाईकोर्ट की यह सुनवाई न केवल केजरीवाल के लिए बल्कि इस केस से जुड़े अन्य पहलुओं के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अदालत के निर्णय से इस मामले की दिशा स्पष्ट हो सकती है।