Anti Paper Leak Bill Passed: पेपर लीक रोकने का सख्त कानून लोकसभा में पास, 7 साल जेल और 10 करोड़ जुर्माना

लोकसभा ने एंटी पेपर लीक बिल को मंजूरी देकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नए कानून के तहत पेपर लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के लिए सात साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। आखिर किन मामलों में यह कानून लागू होगा और इससे छात्रों पर क्या असर पड़ेगा, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Anti Paper Leak Bill Passed

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 29, 2026

Anti Paper Leak Bill Passed: लोकसभा ने बुधवार को पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया। सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कई मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा और लगातार हंगामा किया, लेकिन इसके बावजूद विधेयक को सदन से मंजूरी मिल गई। सरकार का कहना है कि यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

विपक्ष के विरोध के बीच हुई विधेयक की मंजूरी

विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार की परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक की घटनाओं और युवाओं के भविष्य को लेकर कई सवाल उठाए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और सरकार इस समस्या को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं रही। इस दौरान सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बनी, जिसके कारण कार्यवाही भी प्रभावित हुई। हालांकि सभी घटनाक्रमों के बीच सरकार ने विधेयक को ध्वनि मत से पारित करा लिया।

मंगलवार को नौ घंटे तक चली थी विस्तृत चर्चा

इस संशोधन विधेयक पर मंगलवार को लोकसभा में लगभग नौ घंटे तक लंबी चर्चा हुई थी। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपने-अपने विचार रखे तथा विभिन्न सुझाव भी दिए। सरकार की ओर से कहा गया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कानून को और अधिक प्रभावी बनाना आवश्यक है। वहीं विपक्ष ने कानून के साथ-साथ उसकी प्रभावी क्रियान्वयन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर सरकार का जोर

सरकार का कहना है कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना भी है। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल, तकनीकी धोखाधड़ी और अन्य अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए इस कानून के प्रावधानों को और मजबूत किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित होगी और मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय मिलेगा।

विपक्ष ने उठाए युवाओं से जुड़े मुद्दे

चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है। कई सांसदों ने छात्रों के आंदोलन, बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से व्यापक सुधारों की मांग की। विपक्ष का कहना था कि युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए केवल विधायी बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे।

राज्यसभा में वंदे मातरम् से जुड़ा विधेयक भी पारित

उधर संसद के उच्च सदन राज्यसभा में भी बुधवार का दिन महत्वपूर्ण रहा। राज्यसभा ने ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने से संबंधित विधेयक को मंजूरी दे दी। इस विधेयक के पारित होने के बाद अब राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उससे जुड़े प्रावधानों को लेकर नई कानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सदन में इस विधेयक पर भी विभिन्न दलों के सांसदों ने अपने विचार रखे और इसके महत्व पर चर्चा की।

संसद के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधायी कार्य

बुधवार को संसद के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए गए। एक ओर लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े संशोधन विधेयक को पारित किया, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा ने वंदे मातरम् के सम्मान से संबंधित विधेयक को मंजूरी दी। इन दोनों विधेयकों के पारित होने के साथ ही संसद के मानसून सत्र में सरकार ने अपनी विधायी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

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