UP News: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से शिष्टाचार मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद सियासी और धार्मिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अखिलेश यादव ने इस मुलाकात को सनातन परंपरा की रक्षा और धर्म को अधर्मियों के चंगुल से मुक्त कराने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
अखिलेश यादव का एक्स (ट्विटर) पोस्ट
बताते चले कि, मुलाकात के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें साझा करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने लिखा कि आज प्रातः काल पूज्य शंकराचार्य जी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। अखिलेश यादव ने इस वार्ता को अत्यंत सार्थक बताते हुए कहा कि बैठक के दौरान सनातन संस्कृति पर आए मौजूदा संकट को दूर करने तथा धर्म को अधर्मियों के चंगुल से मुक्ति दिलाने के संबंध में गहन और गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धर्म की रक्षा के लिए संतों का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है।
राम मंदिर में कथित चंदा चोरी का मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के गहरे सियासी मायने हैं। अखिलेश यादव लगातार अयोध्या के राम मंदिर में हुई कथित चढ़ावा और चंदा चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं। इस बैठक के बहाने उन्होंने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। सपा प्रमुख का आरोप है कि मंदिर के गर्भगृह और दानपात्रों से जुड़े विवादों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है और वे इस मुद्दे के सहारे सरकार की शुचिता पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर सनातन समाज की नाराजगी
अखिलेश यादव ने पूर्व में दिए अपने बयानों को दोहराते हुए कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा, चंदा और दान चोरी का समाचार अब विश्वव्यापी हो चुका है। दुनिया के कोने-कोने में रहने वाले सनातनी श्रद्धालु भाजपा और उनके सहयोगियों के इस कृत्य से बेहद आहत और शर्मसार हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले जिन भक्तों ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी गाढ़ी कमाई दान की थी, वे आज ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस पूरे प्रकरण से वैश्विक स्तर पर सनातन समाज में भारी आक्रोश है क्योंकि भाजपा के ‘अधर्मियों’ के कारण देश और धर्म दोनों की बदनामी हो रही है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रुख
दूसरी ओर, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस मुलाकात के दौरान देश के ज्वलंत धार्मिक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने विशेष रूप से गोवंश की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज गौमाता के साथ घोर अन्याय हो रहा है और वे भूख-प्यास से दम तोड़ रही हैं। उन्होंने गौसंवर्धन का दावा करने वाली सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शंकराचार्य ने गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने और उनके पूर्ण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर मुद्दे पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि मंदिर की व्यवस्थाओं और संचालन में सच्चे रामभक्तों की भूमिका अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए।










