UP Politics: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को अब लोहिया ट्रस्ट की कमान भी मिल गई है। ट्रस्ट की बैठक में सभी सदस्यों ने अखिलेश यादव के नाम पर सहमति जताते हुए उन्हें अध्यक्ष बनाने का फैसला किया। खास बात यह रही कि बैठक में शिवपाल सिंह यादव भी मौजूद थे। वर्ष 2017 से लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी शिवपाल यादव संभाल रहे थे। ऐसे में नेतृत्व में यह बदलाव समाजवादी परिवार की मौजूदा सियासी स्थिति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
2017 के पारिवारिक विवाद के बाद शिवपाल को मिली थी जिम्मेदारी

लोहिया ट्रस्ट के नेतृत्व में यह बदलाव करीब नौ साल बाद हुआ है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी परिवार में खुलकर विवाद सामने आया था। उस दौर में पार्टी और परिवार के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज थी। इसी दौरान मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव को लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल सिंह यादव को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद लंबे समय तक शिवपाल ट्रस्ट की कमान संभालते रहे।
शिवपाल यादव की मौजूदगी में अखिलेश के नाम पर लगी मुहर
अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट का नया अध्यक्ष बनाने का निर्णय जिस बैठक में हुआ, उसमें शिवपाल सिंह यादव भी मौजूद रहे। बैठक में दीपक मिश्रा, आदित्य यादव, राम नरेश यादव, राम सेवक यादव, वीरपाल यादव और राजेश यादव समेत अन्य सदस्यों ने अखिलेश के नाम पर सहमति जताई। इस तरह ट्रस्ट के नेतृत्व में बदलाव सर्वसम्मति से हुआ। शिवपाल की मौजूदगी को भी इस फैसले के राजनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
समाजवादी राजनीति में लोहिया ट्रस्ट की अहम भूमिका
लोहिया ट्रस्ट का गठन 1992 में समाजवादी पार्टी के गठन से भी पहले हुआ था। लंबे समय से यह समाजवादी विचारधारा और लोहियावादी राजनीति से जुड़े नेताओं के लिए महत्वपूर्ण मंच रहा है। ट्रस्ट ने पार्टी और उससे जुड़े राजनीतिक-सामाजिक कार्यक्रमों के लिए संसाधन जुटाने में भी भूमिका निभाई है। ऐसे में इसकी कमान अखिलेश यादव के हाथ में आना समाजवादी संगठन और परिवार की राजनीति के लिहाज से बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
2027 यूपी चुनाव से पहले अखिलेश के हाथ मजबूत

अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। राजनीतिक जानकार इस फैसले को समाजवादी परिवार और पार्टी से जुड़े संस्थागत मंचों के अखिलेश के नेतृत्व में और अधिक केंद्रीकृत होने के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। वर्ष 2017 में जहां परिवार और संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर टकराव दिखाई देता था, वहीं अब राजनीतिक परिस्थितियां काफी बदली हुई नजर आ रही हैं।
शिवपाल और अखिलेश के रिश्तों को लेकर भी चर्चा तेज
शिवपाल यादव की मौजूदगी में अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाए जाने से दोनों नेताओं के रिश्तों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। वर्ष 2017 के विवाद के बाद चाचा-भतीजे की राजनीतिक राहें अलग हुई थीं। शिवपाल ने अलग पार्टी बनाई और बाद में समाजवादी पार्टी के साथ फिर से आए। अब ट्रस्ट की जिम्मेदारी अखिलेश को सौंपे जाने से यह संकेत मिल रहा है कि समाजवादी परिवार में पुरानी राजनीतिक खींचतान की जगह एकजुटता को प्राथमिकता दी जा रही है।
ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना

अखिलेश यादव के लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस फैसले पर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को अपने चाचा शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं है। उन्होंने शिवपाल के पुराने बयानों का हवाला देते हुए सपा और उनके बीच रहे मतभेदों की याद भी दिलाई।
राजभर ने शिवपाल के पुराने राजनीतिक रुख का किया जिक्र
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि शिवपाल यादव पहले समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं और एक समय भाजपा के साथ भी रहे थे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि शिवपाल ने अपनी अलग पार्टी बनाई थी। राजभर का सवाल था कि ऐसे राजनीतिक इतिहास के बावजूद अखिलेश यादव अब उन पर किस तरह भरोसा कर सकते हैं। उनके बयान के बाद लोहिया ट्रस्ट का फैसला यूपी की सियासत में नया राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है।
लोहिया ट्रस्ट का फैसला 2027 की सियासत में कितना अहम?
लोहिया ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव को मिलना सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। एक तरफ अखिलेश पार्टी और अब ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शिवपाल की बैठक में मौजूदगी पुराने पारिवारिक मतभेदों की तुलना में बदली हुई राजनीतिक तस्वीर पेश करती है। आने वाले समय में यह बदलाव समाजवादी पार्टी की चुनावी रणनीति और परिवार की भूमिका पर कितना असर डालता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।










